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Hindenburg Report vs Adani Group: गौतम अडानी के नेतृत्व वाले Adani Group की मुश्किलें बुधवार को बढ़ती नजर आई, जब इसकी सातों कंपनियों के शेयर लगातार गिरावट दर्ज करते दिखाई देने लगें।लेकिन सबसे ज़्यादा सुर्खियाँ मिलीं, इसके पीछे के कारण को!

असल में मशहूर अमेरिकी रिसर्च फर्म, हिंडनबर्ग (Hindenburg Research) की एक हालिया रिपोर्ट ने मानों Adani Group को हिला कर रख दिया है। हिंडनबर्ग की इस रिपोर्ट में दशकों से Adani Group के ‘स्टॉक मार्केट में हेरफेर’ और ‘अकाउंटिंग संबंधी धोखाधड़ी’ में शामिल होने की बात कही गई है।

फिर क्या था, इस रिपोर्ट के सामने आते ही, अडानी ग्रुप की तमाम कंपनियों के शेयर रेड जोन में कारोबार करते नजर आए।

असल में रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन सालों में $100 बिलियन से अधिक की वृद्धि करते हुए, हैरान करने वाले अंदाज में अडानी ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन, गौतम अडानी (Gautam Adani) की कुल संपत्ति लगभग $120 बिलियन हो गई है।

इस वृद्धि के पीछे का मुख्य कारण इस रिपोर्ट में अडानी ग्रुप के अंतर्गत आने वाली तमाम कंपनियों के शेयरों की कीमतों में दर्ज की गई हैरतंगेज बढ़ौतरी को बताया गया है। इनमें सबसे अहम ग्रुप के तहत आने वाले 7 कंपनियाँ रहीं, जिन्होंने संबंधित अवधि के दौरान औसत रूप से 819% तक की बढ़त दर्ज की।

रिपोर्ट कहती है कि अडानी ग्रुप की कंपनियां शॉर्ट पोजीशन में हैं। इन कंपनियों पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए, इनके द्वारा लिए गए कर्जो पर भी रिपोर्ट में कुछ सवाल उठाए गए हैं। साथ ही इसमें कंपनियों के शेयर को 85% तक ओवर-वैल्यूड करार दिया गया।

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फोरेंसिक फाइनेंशियल रिसर्च कंपनी के अनुसार, इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए अडानी ग्रुप के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों सहित कई लोगों का साक्षात्कार लिया गया, हजारों दस्तावेजों की जांच की गई, और करीब एक दर्जन से अधिक देशों की कई आधिकारिक वेबसाइट व आँकड़ो को टटोला गया है।

हिंडनबर्ग की मानें तो वह पिछले 2 सालों से अडानी ग्रुप को लेकर जांच कर रहे है। कंपनी पर अनुचित रूप से बढ़े स्टॉक को गिरवी रखकर कर्ज लेने के भी आरोप लगाए गए हैं।

जाहिर तौर पर इस रिपोर्ट के सामने आते ही, अडानी ग्रुप की सातों कंपनियों के शेयरों ने गिरावट दर्ज करते हुए, बुधवार को अपने कुल मार्केट कैप में से लगभग ₹46,000 करोड़ गंवा दिए।

Hindenburg Report पर Adani Group की प्रतिक्रिया  

इस बीच इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अडानी ग्रुप की ओर से इसकी विश्वसनीयता और टाइमिंग पर भी सवाल उठाए गए।

अडानी ग्रुप की ओर से कहा गया कि रिपोर्ट को अभी पेश करके, साफ तौर पर अडानी ग्रूप की प्रतिष्ठा को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, जिससे अडानी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) के आने वाले फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफरिंग को भी नुकसान पहुंचाया जा सके, जो शायद भारत का सबसे बड़ा एफपीओ हो सकता है।