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MSMEs News: बीतें सालों में महामारी के चलते लॉकडाउन आदि की वजह से, छोटे-बड़े सभी प्रकार के व्यवसायों को भारी नुकसान सहना पड़ा। लेकिन बड़े व्यवसायों के पास जहाँ बैंक आदि से वित्तीय मदद हासिल कर पाने के तमाम विकल्प उपलब्ध होते हैं, वहीं छोटे व्यवसायों के लिए ‘लोन’ हासिल करना खुद में एक बड़ी चुनौती होती है।

ऐसे में इन्हीं सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) व्यवसायों को डूबने से बचाने के लिए सरकार ने कोविड के दौरान इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) की शुरुआत की थी।

और अब सामने आए आँकड़ो के मुताबिक, इस इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) के चलते कम से कम 14.6 लाख सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) को डूबने से बचाया जा सका है, जो इसके तहत करीब ₹2.2 लाख करोड़ के अतिरिक्त क्रेडिट से लाभान्वित हुए हैं।

असल में SBI Research द्वारा किए गए विश्लेषण में ये आँकड़े सामने आए हैं। इस रिपोर्ट में SBI के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्यकांति घोष की ओर से कहा गया है कि इस अतिरिक्त क्रेडिट के चलते सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) बकाया राशि के लगभग 12% से अधिक हिस्से को नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बनने से बचाया जा सका है।

वहीं अगर देशवासियों के संदर्भ में देखा जाए तो आँकड़े बताते हैं कि इसने करीब 6.6 करोड़ लोगों की आजीविका को ख़त्म होने से बचाया है। असल में ECLGS योजना ने जाहिर तौर पर MSMEs में लोन हासिल करने की दर को बढ़ाने में मदद की है।

MSMEs News: Emergency Credit Line Guarantee Scheme या ECLGS

रिपोर्ट के आँकड़े बताते हैं कि इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) के दौरान बैंकों ने  MSMEs को कुल मिलाकर लगभग ₹2.2 लाख करोड़ का कर्ज दिया।

दिलचस्प यह भी है कि रिपोर्ट के अनुसार, कई MSMEs ने इस वित्तीय सहायता के चलते ₹250 करोड़ के टर्नओवर की सीमा को पार करते हुए, MSME की नई परिभाषा के लिहाज से ‘मध्यम आकार’ के कॉर्पोरेट्स दर्जे को हासिल किया है।

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नई सरकारी परिभाषाओं के तहत देखें तो भारत में फिलहाल MSMEs की कुल संख्या लगभग 6.4 करोड़ है, वहीं चीन में यह आँकड़ा 14 करोड़ का आसपास बताया जाता है ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NSS के 73वें दौर के सर्वे (2015-16) के आँकड़ो की मानें तो तब देश में कुल 6.34 करोड़ MSMEs थे, जिनमें से 99.47% सूक्ष्म, 3.3 लाख SMEs और 10,000 मध्यम इकाईयाँ थीं। इनमें सभी में 52.3% ग्रामीण क्षेत्रों, और 48.8% शहरी क्षेत्रों में हैं।

आपको बता दें बीते कुच सालों में MSMEs क्षेत्र को लेकर सरकार ने कुछ बड़े बदलावों को अंजाम दिया है, जिसके तहत इन्हें नए रूप से परिभाषित करने का काम किया गया और साथ ही MSMEs के लिए सरकार के उद्यम पोर्टल (Udyam Portal) पर रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य कर दिया था।

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक या सिडबी (SIDBI) द्वारा बनाये गए Udyam Assist प्लेटफॉर्म के जरिए सरकार ने सभी अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों को औपचारिक रूप देने के काम की शुरुआत की है।

आपको बता दें अब तक देश भर में कुल 1.33 करोड़ एमएसएमई (MSMEs) के पास अब उद्यम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने के बाद मिला सर्टिफिकेशन है।