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Made-in-India – BharOS: भारत एक बड़ा बाजार होने के साथ ही अब तेजी से प्रोडक्ट्स व सेवाएँ के मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भी उभरने की कामयाब कोशिशें कर रहा है। ‘मेक-इन-इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी सरकारी पहलों के चलते इन प्रयासों को मजबूती भी मिल रही है।

इसी क्रम में अब बाजार में Android के एकाधिकार को चुनौती देने के लिए देश में एक नए संभावित विकल्प ने उम्मीद बाँधी है, जो है भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप – JandK Operations Private Limited (JandKops) द्वारा विकसित किया गया BharOS, जिसे ‘भरोस’ भी कहा जा रहा है।

यह एक स्वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम है, जिसे कमर्शियल ऑफ-द-शेल्फ हैंडसेट पर इंस्टॉल किया जा सकता है। जाहिर है भारत में 100 करोड़ से भी अधिक स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या को देखते हुए, स्वदेशीकरण की कोशिशों में यह एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया है।

BharOS

दिलचस्प ये है कि अब सरकार ने भी इसकी ओर ध्यान देना शुरू कर दिया है। असल में आज यानी 24 जनवरी को केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishaw) और केंद्रीय शिक्षा मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने इस स्वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम – BharOS को टेस्ट किया।

इस दौरान केंद्रीय मंत्री, अश्विनी वैष्णव ने BharOS (भरोस) को ‘भरोसा’ करार देते हुए कहा;

“इस स्वदेशी विकल्प को व्यापक बनाने के सफर में बेशक मुश्किलें आएंगी। दुनिया भर में कई ऐसे लोग हैं जो नहीं चाहेंगे कि ऐसा कोई प्रयास सफल हो। इसलिए हमें बहुत सावधानी से निरंतर प्रयास करते हुए, इसे सफल बनाना है।”

खबरों के मुताबिक यह स्वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम वर्तमान में उन संगठनों व संस्थानों को प्रदान किया जा रहा है, जिनके लिए कड़ी प्राइवेसी और सुरक्षा बेहद अहम है।

जाहिर है ऐसे संगठनों के उपयोगकर्ता तमाम तरीके की संवेदनशील जानकारियों को संभालनें का काम करते हैं, ऐसे में मोबाइल डिवाइस पर प्राइवेट कम्युनिकेशन की सख्त जरूरत होती है। और यह ऑपरेटिंग सिस्टम हाईटेक सिक्योरिटी और प्राइवेसी को अपने सबसे मजबूत फीचर के रूप में पेश करता है।

शायद यही वजह है कि यह स्वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम बिना किया ‘डिफॉल्ट ऐप्स’ के साथ आता है, मतलब ये कि इसके उपयोगकर्ताओं को मोबाइल डिवाइस पर कोई भी ऐप डिफ़ॉल्ट रूप से इंस्टॉल नहीं मिलती हैं और वे अपनी आवश्यकता के अनुसार ही चुनिंदा ऐप्स को इस्तेमाल कर सकते हैं।

अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक सुझाव देते हुए यह कहा कि इसके नाम के अंत में एक ‘a’ लगाने से यह ‘BharOSa’ या कहें तो ‘भरोसा’ बन सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि नाम का भी अपना महत्व होता है।