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Google warns smartphones will cost more: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा अक्टूबर 2022 में टेक दिग्गज गूगल (Google) पर लगाए गए लगातार दो भारी जुर्मानों के बाद, कंपनी फिलहाल राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल या NCLAT) और सुप्रीम कोर्ट में इन आदेशों को चुनौती देने की कोशिश में है।

लेकिन हाल ही में NCLAT ने दोनों मामलों की सुनवाई के दौरान Google India को किसी भी प्रकार की कोई अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए, दोनों जुर्मानों की लगभग 10% राशि को तत्काल रूप से जमा करने के आदेश दिए। जाहिर है कंपनी के लिए ये एक बड़ा झटका रहा।

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याद दिला दें, अक्टूबर 2022 को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं को अपनाने का दोषी मानते हुए, गूगल इंडिया (Google India) पर लगभग ₹1,338 करोड़ का जुर्माना लगाया था।

इसके कुछ ही दिनों बाद भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने प्ले स्टोर (Play Store) पॉलिसी को लेकर बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का दुरुपयोग करने का दोषी पाते हुए Google पर ₹936.44 करोड़ का जुर्माना लगाया था।

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इन आदेशों के ख़िलाफ Google शुरू से ही मुखर नजर आया। और अब शुक्रवार को कंपनी ने अपने एक ब्लॉग पोस्ट में यह चेतावनी दी है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के इन दोनों फैसलों के चलते देश में स्मार्टफोन्स की कीमतें महंगी हो सकती हैं और उपयोगकर्ता सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

“Smartphones will cost more:” Google

साझा किए गए एक लंबे ब्लॉग पोस्ट में टेक दिग्गज ने कहा है कि CCI के आदेशों के चलते स्मार्टफोनों के लिए कंपनी के पेटेंट एंड्रॉइड (Android) ऑपरेटिंग सिस्टम के ‘अलग- अलग वर्जन’ बनने लगेंगे और एंड्रॉइड (Android) के ये वर्जन Google को स्मार्टफोन व अन्य डिवाइसों को सुरक्षित बनाने से रोकेंगे क्योंकि वे कंपनी द्वारा प्रदान की जाने वाली “प्राइवेसी और उपयोगकर्ता सुरक्षा” फीचर्स को सपोर्ट नहीं करेंगें।

कंपनी ने इस मुद्दे को विस्तार से बताते हुए लिखा;

“ये नए संभावित एंड्रॉइड वर्जन, Google द्वारा प्रदान की जाने वाली ‘उपयोगकर्ता सुरक्षा’ फीचर्स का सपोर्ट नहीं करेंगे, इसलिए ऐसे डिवाइसों की सुरक्षा संबंधित जिम्मेदारी (OEMs ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर) पर आएगी। ऐसे में OEMs के लिए यह आवश्यक हो जाएगा कि वह लगातार हर साल बड़े पैमाने पर निवेश करें और उपयोगकर्ता सुरक्षा फीचर्स को अपग्रेड करते रहें।”

ऐसे में साफ है अगर OEMs पर खर्चो का भार बढ़ता है तो वे इसको सीधे तौर पर ग्राहकों से वसूलेंगे, जिसका एक ही जरिया है कि स्मार्टफोनों की कीमतें बढ़ाई जाएँ।

असल में भारतीय प्रतिस्पर्धा नियामक ने अपना फैसल सुनाते समय यह निर्देश दिए थे कि डिवाइस निर्माताओं को Google द्वारा प्रदान की जाने वाली अन्य तमाम सेवाओं को प्री-इंस्टॉल करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।

इसके मुताबिक, OEMs के लिए प्ले स्टोर के लाइसेंस के तहत Google Search सेवाओं जैसे Chrome ब्राउजर, YouTube आदि को प्री-इंस्टॉल करने जैसी शर्तों को नहीं शामिल किया जा सकता।

अपने इस ब्लॉग पोस्ट में Google ने कहा कि यह एंड्रॉइड के अनुकूलता प्रोग्रामों के कारण ही छोटे डेवलपर्स के पास भी बेहद कम समय में एक विशाल उपयोगकर्ता आधार तक पहुंच हासिल करने का विकल्प था और वे अपने प्रोडक्ट की योग्यता के आधार पर उचित रूप से बड़े डेवलपर्स के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते थे।

लेकिन कंपनी ने कहा कि इन आदेशों के लागू होने के बाद छोटे डेवलपर्स के पास अब एंड्रॉइड के साथ खेलने के समान अवसर उपलब्ध नहीं होंगे, बड़े डेवलपर्स Android के नए वर्जन का समर्थन करते हुए उन पर हावी हो जाएँगे।

साथ ही कंपनी ने यह भीआगाह किया कि CCI के फैसले के बाद भारतीय के बीच इंटरनेट ईकोसिस्टम की एक अगली लहर देखने को मिलेगी, जिसमें लोग ‘साइबर अपराधों, बग और मैलवेयर के संपर्क में अधिक आ सकते हैं।

इसके पहले भी अक्टूबर में ही Google India ने यह साफ किया था कि CCI के फैसले से भारत के स्मार्टफोन बाजार में प्रतिकूल असर पड़ सकता है। बता दें CCI का आदेश 19 जनवरी से लागू हो रहा है और कंपनी के मुताबिक, इन निर्देशों की वजह से पिछले 15 सालों में देश में हुआ Andorid ईकोसिस्टम का विकास रुक जाएगा।

इस बीच Google Inida ने CCI के जुर्माने संबंधित आदेश को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी है, जिस पर 16 जनवरी को सुनवाई होनी है।