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Credits: Wikimedia Commons

WhatsApp & Other OTTs May Soon Need Telecom Licence: इंटरनेट के चलते तेजी से बदलते इस दौर में तमाम नई तकनीकों को लेकर ‘रेगुलेशंस व कानूनों’ का स्वरूप तय करने के क्रम में दुनिया भर के कई देश संघर्ष करते नजर आ रहे हैं, जिससे भारत भी अछूता नहीं है।

भारत सरकार डिजिटल तकनीकों और सेवाओं को लेकर लगातार नए पुख्ता नियमों को गढ़ने की दिशा में काम कर रही है, और इसी क्रम में अब एक अहम कदम देखने को मिल रहा है।

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असल में सामने आई खबरों के मुताबिक, जल्द ही इंटरनेट कॉलिंग व मैसेजिंग सेवाएँ प्रदान करने वाले ‘ओवर द टॉप’ (OTT) प्लेटफॉर्म जैसे WhatsApp, Zoom, Skype, Google Duo आदि को भारत में ये सेवाएँ आगे भी प्रदान करते रहने के लिए टेलीकॉम लाइसेंस लेना पड़ सकता है।

WhatsApp & Other OTTs May Soon Need Telecom Licence?

इस बात का उल्लेख दूरसंचार विधेयक 2022 (Telecom Bill 2022) के मसौदे (ड्राफ्ट) में किया गया है। बात ये है कि दूरसंचार विधेयक-2022 के ड्राफ्ट में ‘ओवर द टॉप’ (OTT) कंपनियों जैसे WhatsApp, Zoom आदि को भी दूरसंचार सेवा के तौर पर शामिल करने की बात कही गई है।

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Credit: (Twitter/@Google Workspace)

बुधवार को जारी किए गए टेलीकॉम बिल-2022 के ड्राफ्ट के मुताबिक, टेलीकम्यूनिकेशन सर्विसेज और टेलीकॉम नेटवर्क को लेकर संबंधित कंपनियों को सरकार से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।

Indian Telecommunication Bill, 2022 – Draft: Read here!

भारतीय दूरसंचार विधेयक-2022 के मसौदे का लिंक ट्विटर पर शेयर करते हुए, भारत के दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने लोगों से इस मसौदे को लेकर अपने विचार भी साझा करने की अपील की। बता दें आप 20 अक्टूबर तक टेलीकॉम बिल-2022 के इस ड्राफ्ट पर अपनी टिप्पणी भेज सकते हैं।

इस विधेयक के मसौदे में केंद्र या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संवाददाताओं के ‘भारत में प्रकाशित होने वाले प्रेस संदेशों’ को इंटरसेप्शन से छूट देने के प्रस्ताव का भी उल्लेख देखने को मिलता है।

लेकिन यह मसौदा ये भी कहा है कि किसी भी सार्वजनिक आपात स्थिति के मामले में या भारत की सार्वजनिक सुरक्षा, संप्रभुता, अखंडता या सुरक्षा के हित में या विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, सार्वजनिक व्यवस्था, या किसी अपराध के लिए उकसाने को रोकने को लेकर कोई विशेष छूट नहीं दी जाएगी।

इस बिल के मसौदे के अनुसार, अगर ऊपर जिन स्थितियों का उल्लेख किया गया है, वैसा कुछ होता है तो ऐसे मामलों में कोई भी दूरसंचार सेवा प्रदाता या दूरसंचार नेटवर्क द्वारा ऐसे किसी भी संदेश का प्रसारण नहीं किया जाएगा, साथ ही जरूरत पड़ने पर, सेवा प्रदाताओं को मैसेज व अन्य जानकारियाँ संबंधित अधिकृत अधिकारी से साझा भी करनी होंगी।

क्या WhatsApp व अन्य ऐप्स पर इंटरनेट कॉलिंग और मैसेजिंग के लिए देने होंगे पैसे? 

जैसे ही WhatsApp, Facebook, Zoom आदि को टेलीकॉम लाइसेंस लेने संबंधित बात सामने आई, तो ऐसे में इंटरनेट पर ये खबर भी तेजी से फैलने लगी कि अगर इन कंपनियों को इंटरनेट कॉलिंग व मैसेज के लिए टेलीकॉम लाइसेंस खरीदने की जरूरत पड़ी, तो ऐसे में यह अपने यूजर्स को भी फिलहाल इन मुफ्त सेवाओं के लिए कुछ पैसे चार्ज करना शुरू कर सकती हैं।

आपको याद दिला दें कि साल 2008 के दौरान TRAI ने भी ऐसी ही कुछ सिफारिश की थी और कहा था कि इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को सामान्य टेलीफोन नेटवर्क पर इंटरनेट कॉल प्रदान करने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन उन्हें इंटरकनेक्शन शुल्क के लिए भुगतान करना होगा, वैध अवरोधन उपकरण स्थापित करने होंगे और कई सुरक्षा एजेंसियों के नियमों का भी पालन सुनिश्चित करना होगा।

इसके बाद ये मुद्दा साल 2016-17 में भी चर्चा का विषय बना था, जब ‘नेट-न्यूट्रैलिटी’ एक बड़ा मुद्दा बनते नजर आने लगा था।

ये भी कहा जाता रहा है कि दूरसंचार ऑपरेटर बीते काफी समय से सभी इंटरनेट आधारित कॉलिंग और मैसेजिंग सेवाओं के लिए एक समान कानून की मांग कर रहे हैं।

अब देखना दिलचस्प होगा कि भला आने वाले वक्त में WhatsApp जैसी ऐप्स इन नए नियमों पर कैसी प्रतिक्रियाएँ देते हैं और क्या वाकई इनकी तमाम सेवाओं के लिए पैसे देने होंगे, इसका पता भी आने वाले कुछ समय में चल जाएगा!