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Government panel about online gaming: भारत में ऑनलाइन गेमिंग के भविष्य को लेकर पिछले कुछ समय से काफी चर्चाएं हो रही हैं। इस दिशा में भारत सरकार भी लगातार प्रयास कर रही है ताकि ऑनलाइन गेमिंग के नियमों को स्पष्ट रूपरेखा प्रदान की जा सके।

इसी क्रम में अब यह सामने आया है कि भारत सरकार के द्वारा बनाए एक पैनल ने देश में ऑनलाइन गेमिंग के लिए एक ‘नियामक संस्था’ और इस क्षेत्र से संबंधित ‘कुछ नए नियमों‘ को बनाने की सिफारिश की है।

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यह खबर Reuters की एक हालिया रिपोर्ट के जरिए सामने आई है, जिसमें भारत सरकार के आधिकारियों द्वारा तैयार एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, पैनल ने ऑनलाइन गेमिंग के प्रतिबंधित प्रारूपों को ब्लॉक करने के लिए नए नियमों को पेश करने और जुआ (गैम्ब्लिंग) से जुड़ी वेबसाइटों, ऐप्स आदि को लेकर सख्त रुख अपनाने की भी बात कही है।

आपको बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार में शीर्ष अधिकारियों से बना ये पैनल महीनों से देश के ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर के लिए नियमों का मसौदा (ड्राफ़्ट) तैयार कर रहा है।

ये इसलिए भी दिलचस्प हो जाता है क्योंकि बीते कुछ सालों में भारत में ऑनलाइन गेमिंग एक अप्रत्याशित उछाल दर्ज कर रहा है। आलम ये है कि Tiger Global और Sequoia Capital जैसे दिग्गज वैश्विक निवेशकों ने भारत के कुछ बेहद लोकप्रिय बन चुके गेमिंग स्टार्टअप्स Dream11 और Mobile Premier League आदि में निवेश किया है।

ये इसलिए भी अहम है क्योंकि इस रिपोर्ट का इंतजार काफी बेसब्री से किया जा रहा था, क्योंकि माना ये जा रहा है कि इस रिपोर्ट में की गई सिफ़ारिशें भारत में मोबाइल गेमिंग उद्योग के भविष्य को आकार देने मीन अहम भूमिका निभाने वाली हैं।

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर फिलहाल लगभग $1.5 बिलियन के आसपास का माना जाता है, जो एक अनुमान के मुताबिक साल 2025 तक $5 बिलियन से भी अधिक हो जाएगा।

भारत में ऑनलाइन गेमिंग जगत की सबसे बड़ी समस्या ये रही है कि देश में इन खेलों को परिभाषित करना अक्सर विवादास्पद ही साबित हुआ है।

आपको याद हो तो कुछ समय पहले भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ये कहा था कि कार्ड गेम जैसे रम्मी (Rummy) और कुछ फैंटेसी गेम्स असल में स्किल (Skill) आधारित और कानूनी गेम्स हैं।

लेकिन देश में ही एक राज्य अदालत ने पोकर (Poker) जैसे खेलों को चांस-बेस्ड या जुए के समान वर्गीकृत किया है, जिन्हें देश के अधिकांश राज्यों में बैन भी किया हुआ है।

Government panel about online gaming?

बहरहाल! बात सामने आए इस गोपनीय ड्राफ़्ट की करें तो रिपोर्ट के अनुसार, इसमें सरकारी अधिकारियों के पैनल ने भारत के आईटी मंत्रालय से स्पष्ट रूप से यह कहा है कि इस क्षेत्र में एक नए नियामक निकाय को बनाने की ज़रूरत है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि कौन से ऑनलाइन गेम स्किल आधारित है और फिर उसको ध्यान में रखते हुए ही नियम व क़ानूनों की रुप रेखा तैयार की जानी चाहिए।

इतना ही नहीं बल्कि कानूनी पहलू को सुव्यवस्थित करने के लिए इस 108-पृष्ठ की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को एक नए केंद्रीय ऑनलाइन गेमिंग कानून की र्जरुआत है, जिससे “प्रतिबंधित गेमिंग प्रारूपों के खिलाफ सरकार दंड प्रावधानों के साथ ही, गेम्स को बैन करने की शक्तियों को भी स्पष्ट किया जा सके।

ख़ैर! अब देखना ये है कि सामने आई इस रिपोर्ट के बाद अब सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से इस पर क्या बयान या कदम उठाए जाते हैं?