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Credits: Wikimedia Commons

Kerala Savari: इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि आज के दौर में Uber और Ola जैसी तमाम कैब सेवाएँ लोगों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बनती जा रही हैं। और ये बात अब देश के मेट्रो शहरों के अलावा टियर-1 और टियर-2 जैसे शहरों के लिए भी सच साबित हो रही है।

लेकिन देश के कैब सर्विस सेगमेंट में Ola और Uber का वर्चस्व माना जाता है, जिसके चलते अक्सर इन कंपनियों पर कैब सर्विस चार्ज, सर्ज चार्ज और यहाँ तक की सुरक्षा आदि को लेकर भी सवाल उठते रहतें हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न ये खड़ा होता है कि आखिर इनका विकल्प क्या हो सकता है?

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ऐसा लगता है कि देश में पहली बार एक राज्य सरकार इस प्रश्न के जवाब के साथ सामने आई है। असल में हम बात कर रहें हैं केरल सरकार की, जिसने जल्द ही राज्य में खुद की कैब सर्विस, ‘Kerala Savari‘ को लॉन्च करने का ऐलान किया है।

जाहिर है भारत में ये किसी राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई अपनी तरह की पहली पहल होगी। दिलचस्प रूप से इसके लिए लोगों को अधिक इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा क्योंकि इसको अगले ही महीनें यानि अगस्त में पेश किया जा रहा है।

जी हाँ! केरल सरकार अगले महीने से अपनी खुद की ई-टैक्सी सेवा शुरू करते हुए सीधे लोकप्रिय ऑनलाइन कैब सेवा प्रदाताओं जैसे Uber और Ola का विकल्प पेश करने के लिए तैयार है।

Kerala Savari नाम से पेश की जा रही इस ऑनलाइन टैक्सी सेवा को केरल राज्य के श्रम विभाग द्वारा राज्य में मौजूदा ऑटो-टैक्सी नेटवर्क को जोड़ने के लक्ष्य के साथ शुरू किया जा रहा है, जिससे जनता के लिए सस्ती दरों पर सुरक्षित और विवाद मुक्त यात्रा सुनिश्चित की जा सके।

इसको लेकर केरल के सार्वजनिक शिक्षा और श्रम मंत्री, वी. शिवनकुट्टी ने कहा,

“ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि देश में कोई सरकार खुद की ऑनलाइन टैक्सी सेवा शुरू कर रही है। यह सरकार श्रमिकों के कल्याण के उद्देश्य से बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रभुत्व वाले क्षेत्र में कदम रखने को तैयार है।”

इस बीच उन्होंने यह भी बताया कि इस Kerala Savari ऐप पर तय दर के अलावा सिर्फ 8 फीसदी सर्विस चार्ज ही लिया जाएगा। आपको बता दें, रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाजार में मौजूद अन्य कंपनियों में यही आँकड़ा 20-30 फीसदी है।

Kerala Savari App

साथ ही केरल राज्य के मंत्री ने कहा;

“ये ई-टैक्सी ऐप बच्चों और महिलाओं के लिए पूरी तरह से सुरक्षित होगी। ऐप को सुरक्षा मानकों में बेहद सावधानी के साथ तय किया गया है। ऐप में एक पैनिक बटन सिस्टम भी दिया गया है, ताकि कार की दुर्घटना या किसी भी अन्य प्रकार के खतरे को देखतें हुए, इसको किसी के भी द्वारा निजी तौर पर इस्तेमाल किया जा सके।”

ये तो साफ है कि पूरे देश की निगाहें केरल सरकार की इस नई पहल पर होंगी, क्योंकि लोगों के हित के लिए किसी राज्य सरकार द्वारा टेक दिग्गज कंपनियों को सीधे तौर पर चुनौती देने के उदाहरण कम ही सामने आते हैं।

और अगर ये पहल सफल साबित हुई, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा कि अन्य राज्य सरकारें भी ऐसी योजनाओं की ओर आकर्षित हों!