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Credit: Wikimedia Commons

India to become largest app developer base by 2024: इस बात में कोई शक नहीं है कि दुनिया में हर उभरती तकनीक को अगर वैश्विक रूप से मान्यता चाहिए तो उसके लिए भारत को दरकीनार करना मुश्किल होगा। भारत दुनिया भर की दिग्गज़ टेक कंपनियों के लिए एक सबसे पसंदीदा और अहम बाज़ार बन गया है।

और देश के उज्ज्वल भविष्य की इन्हीं संभावनाओं पर Meta (Facebook) के संस्थापक और सीईओ, मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) ने एक बार फिर मुहर लगाई है।

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असल में Meta द्वारा आयोजित Fuel for India, 2021 ईवेंट पर बोलते हुए कंपनी के संस्थापक ने कहा कि भारत उस राह है जिससे साल 2024 तक यह दुनिया में सबसे अधिक ऐप डेवेलपर्स का गढ़ साबित हो सकता है।

India to have largest app developer base by 2024

सरल शब्दों में मार्क जुकरबर्ग का मानना ये है कि साल 2024 तक दुनिया भर में सबसे अधिक ऐप डेवेलपर्स भारत में ही होंगें।

उनकी मानें तो भारत पहले से ही दुनिया में तेज़ी से लोकप्रिय हो रही Augmented Reality (AR) तकनीक से जुड़े डेवेलपर्स का सबसे बड़ा गढ़ है।

मार्क जुकरबर्ग (Mark Zukerburg) की मानें तो भारत में तेज़ी से बढ़ती उद्यमशीलता की भावना बड़े पैमाने पर संभावना व अवसर पैदा कर रही है।

कंपनी के ‘मेटा फ्यूल फॉर इंडिया-2021′ (Meta Fuel for India- 2021) में मार्क ने भविष्य को लेकर अपने सबसे बड़े सपनें यानि मेटावर्स (Metaverse) के बारे में भी एक बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि भारत असल मायनों में Metaverse के निर्माण व विकास में एक बेहद अहम भूमिका निभाता नज़र आएगा।

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बता दें मेटावर्स (Metaverse) को आप आसान शब्दों में एक ऑनलाइन रियलिटी से रूप में देख सकते हैं, जाहन ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चूअल रियलिटी (VR) जैसी तमाम तकनीकों के इस्तेमाल से उपयोगकर्ताओं को दुनिया भर के कोने कोने से एक वर्चूअल डिजिटल ‘दुनिया’ के भीतर ‘लाइव’ जोड़ा जा सकेगा।

इतना ही नहीं भारत में तेज़ी से बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र को लेकर भी उन्होंने कहा;

“हमनें देश के ऑनलाइन गेमिंग जगत को बीते कुछ सालों में काफ़ी तेज़ी से बढ़ते देखा है और इसलिए देश में गेमिंग क्षेत्र में हमारा निवेश बढ़ता जा रहा है। इसका एक कारण ये भी है क्योंकि यह क्षेत्र प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से मेटावर्स (Metaverse) के रूप में आकार लेने जा रहा है।”

असल में मार्क कई बार सार्वजनिक मंचो पर ये कह चुके हैं कि दुनिया भर में मोबाइल इंटरनेट के बाद मेटावर्स (Metaverse) अगली बड़ी क्रांति के तौर पर जाना जाएगा।

इसके साथ ही मार्क एक और अहम सवाल का जवाब देते नज़र आए, जिसका सामना Facebook से Meta बनी ये कंपनी बीते कुछ सालों से काफ़ी कर रही है – और वो सवाल है यूज़र्स की प्राइवेसी संबंधी सुरक्षा से जुड़ा।

इस विषय पर बोलते हुए Meta के संस्थापक ने कहा;

“हमने इस नई तकनीक को लेकर अपने स्तर पर किए गए प्रयासों में नाटकीय वृद्धि देखी है। और अब हम सुरक्षा आदि को लेकर $5 बिलियन से अधिक का निवेश कर रहे हैं, और इस पर 40,000 से अधिक लोग काम कर रहे हैं।”

“मुझे लगता है कि हम बेहतरीन AI सिस्टम से लैस हैं जो ख़तरनाक कंटेंट संबंधित सभी 20 विभिन्न श्रेणियों की पहचान कर सकता है और वैसे कंटेंट की मात्रा को कम कर सकता है, जो आप प्लेटफ़ॉर्म पर देखना नहीं चाहते हैं।”

इस दौर मार्क जुकरबर्ग ने एक बार पर विशेष ज़ोर दिया कि भारत की इंटरनेट आधारित ईकोनॉमी और इससे जुड़ी संभावनाएँ, उन्हें बेहद उत्साहित करती है।