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Amazon India News: भारत में पहले से ही तमाम विवादों और Reliance-Future Group डील से जूझ रहे Amazon की मुश्किलें और बढ़ती नज़र आ रही हैं और इस बार कारण भी वाक़ई बड़ा है। असल में Amazon India पर अपने प्लेटफ़ॉर्म के सर्च सिस्टम का गलत तरीक़े से इस्तेमाल कर, अन्य विक्रेताओं की तुलना में ख़ुद के प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने के कथित आरोप लगे हैं।

जी हाँ! Reuters की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार Amazon India कथित रूप से देश में लोकप्रिय प्रोडक्ट्स की नक़ल या कहें तो उनको कॉपी करके ख़ुद वैसा ही प्रोडक्ट तैयार करता है और फिर उन प्रोडक्ट्स के अपने वर्जन को प्लेटफ़ॉर्म पर सर्च रिज़ल्ट के रूप में गलत ढंग से प्रमोट करता है।

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साफ़ कर दें कि इस रिपोर्ट में इन तमाम कथित आरोपों का ख़ुलासा कंपनी के आंतरिक ईमेल, रणनीति, योजनाओं और अन्य दस्तावेजों के आधार पर किया गया है।

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Credits: Wikimedia Commons

आसान भाषा में अगर इन आरोपों को देखा जाए तो ये कहा जा सकता है कि “Amazon India ने अपने इन-हाउस ब्रांडों (ख़ुद के ब्रांड) को अपने ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म पर अधिक बढ़ावा देने के लिए गलत तरीक़ों का इस्तेमाल किया, जिसमें यूज़र द्वारा किए जाने वाले सर्च रिज़ल्ट से भी छेड़छाड़ करने की बात सामने आई है, ताकि उस प्रोडक्ट से संबंधित अन्य किसी ब्रांड के बजाए Amazon की ख़ुद की ब्रांड पहले नज़र आए।

Amazon India News: Copied products and rigged search results?

रिपोर्ट का आधार बनाए गए दस्तावेजों के अनुसार, मक़सद था कि बहड लोकप्रिय प्रोडक्ट्स की पहचान की जाए और फिर उनकी नक़ल कर अपने ब्रांड के तहत वैसे ही प्रोडक्ट्स तैयार करके प्लेटफ़ॉर्म पर उनको बढ़ावा दिया जाए, और कंपनी ने ठीक ऐसा किया भी।

इन्हीं दस्तावेज़ो में से एक था “इंडिया प्राइवेट ब्रांड्स प्रोग्राम” टाइटल वाला 2016 का एक डॉक्युमेंट, जिससे पता चलता है कि भारत में अमेज़ॅन (Amazon) की ख़ुद की ब्रांड संचालित करने वाली टीम ने कंपनी के प्लेटफ़ॉर्म से संबंधित सभी यूज़र डेटा को पहले तो गहराई से समझने की कोशिश की जैसे बिक्री संबंधित डेटा या ग्राहकों की प्रोडक्ट्स को लेकर राय, और फिर उन ब्रांड को पहचान कर उनकी नक़ल करने की कोशिश की।

इस रणनीति को नाम दिया गया “Solimo” और ग़ौर करने वाली बात ये है कि रिपोर्ट के मुताबिक़ कंपनी के कई शीर्ष स्तर के अधिकारियों को इसके बारे में पूरी जानकारी थी, कि कंपनी बिज़नेस को बढ़ावा देने के लिए ऐसी प्रथाएँ अपना रही है।

इतना ही नहीं बल्कि कथित रूप से दस्तावेजों में ये सामने आया है कि Amazon के कर्मचारी जो कंपनी के अपने प्रोडक्ट पर काम कर रहे थे, उन्होंने नक़ल करने के लिए टार्गेट किए गए प्रोडक्ट्स के निर्माताओं से साझेदारी करने की योजना बनाई थी, ताकि प्रोडक्ट की क्वॉलिटी को प्रभावित किया जा सके।

इस बात में कोई शक नहीं है कि इन आरोपों के सामने आने के बाद अब कंपनी के लिए देश में मुश्किलें बढ़ती नज़र आ सकती है, क्योंकि देश के कई विक्रेता समूहों ने सरकार से इस मामले की जाँच करने की माँग शुरू कर दी है।

वहीं ज़ाहिर रूप से अमेज़ॅन इंडीया (Amazon India) ने इस तमाम आरोपों को “तथ्यात्मक रूप से गलत और निराधार” बताया है।

कंपनी की मानें तो ग्राहकों के सर्च रिज़ल्ट उनके द्वारा डाले गए ‘सर्च क्वेरी’ (शब्दों) की प्रासंगिकता के आधार पर दर्शाए जाते हैं। सर्च रिज़ल्ट इस बात से प्रभावित नहीं होता कि प्रोडक्ट को किसी प्राइवेट लेबल ब्रांड द्वारा बेचा जा रहा है या नहीं?