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New India Drone Rules 2021: भारत में भी ड्रोन के इस्तेमाल की संभावनाओं को तेज़ी से खंगाला जाने लगा है, फिर चाहे तो ड्रोन के ज़रिए कृषि सुधारों की बात हो या ड्रोन डिलीवरी से जुड़े ट्रायल की।

लेकिन ज़ाहिर है जैसे-जैसे किसी नई चीज़ के व्यापाक इस्तेमाल की शुरुआत हो जाती है, तो उसको लेकर कुछ निश्चित नियमों और नीतियों की ज़रूरत होती है। और भारत में इन्हीं ज़रूरतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने आज गुरुवार को ड्रोन इंडस्ट्री को रेगुलेट करने के लिए ‘नियमों का एक नया सेट’ (New India Drone Rules 2021) पेश किया है।

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ये एक कोशिश है ताकि देश में ड्रोन को लेकर सुरक्षा और अन्य चिंताओं के पहलुओं को संतुलित करते हुए देश में इस तकनीक के “विकास के युग की शुरुआत” की जा सके।

हाल ही में जम्‍मू में इंडियन एयरफोर्स (IAF) के बेस पर हुए ड्रोन हमले के बाद से सरकार और संबंधित विभाग ड्रोन नीतियों को लेकर काफ़ी एक्टिव दिखाई पड़ रहा है।

अपने इसी सुपर एक्शन मोड के चलते अब सरकार ने भारत के लिए ड्रोन रूल्‍स 2021 की घोषणा की है, जो देश में फ़िलहाल चले आ रहे Unmanned Aircraft System Rules 2021 की जगह लेगा। पिछले ही महीने इसका ड्राफ़्ट सामने आया था, लेकिन अब सरकार ने इसको आधिकारिक रूप से नोटिफ़ाई कर दिया है।

New India Drone Rules 2021: भारत के नए ड्रोन नियम 2021

ड्रोन नियम 2021 (Drone Rules 2021) के ज़रिए देश में लोगों और कंपनियों के लिए अब ड्रोन ख़रीदना और उसका संचालन करना काफी आसान बना दिया गया है। असल में नई ड्रोन नीति के तहत लाइसेंस जारी करने को लेकर किए जाने वाले रजिस्ट्रेशन से पहले अब किसी भी सुरक्षा मंजूरी (Security Clearance) की आवश्यकता नहीं होगी।

तो आइए जानते हैं, ऐसे ही क्या कुछ कहते हैं भारत में ड्रोन को लेकर लागू होने जा रहे ये नए नियम:

> भारत में ड्रोन के निर्माण, आयात, परीक्षण, प्रमाणन और संचालन के लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त करने संबंधित फॉर्म की संख्या को 25 से घटाकर 5 कर दिया गया है।

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> वहीं भारी पेलोड ले जाने वाले ड्रोन या फिर कहें तो ड्रोन टैक्सियों के लिए नए नियमों के तहत कवरेज की सीमा को 300 किलोग्राम से बढ़ाकर 500 किलोग्राम कर दिया गया है।

> ड्रोन को लेकर मंज़ूरी हासिल करने के लिए भी अब नाममात्र फीस ही ली जाएगी। साथ ही अधिकतम जुर्माने की राशि को भी घटाकर ₹1 लाख कर दिया गया है। पर साफ़ कर दें कि ये अन्य कानूनों के उल्लंघन पर लागू नहीं होगा।

> सभी ड्रोन का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन डिजिटल स्काई (DigitalSky) प्लेटफॉर्म के ज़रिए ही करना होगा।

> DigitalSky प्लेटफ़ॉर्म पर हरे (Green), पीले (Yellow) और लाल (Red) रंग के इंटरएक्टिव हवाई क्षेत्र प्रदर्शित किए जाएँगे, जिसमें सभी क्षेत्रों से जुड़े अपने कुछ नियम व प्रतिबंध हैं।

> पीले क्षेत्र (Yellow Zone) के तहत एयरपोर्ट के दायरे के 45 किलोमीटर तक की सीमा में ड्रोन न उड़ा सकने की सीमा को अब कम करके 12 किलोमीटर कर दिया गया है।

> साथ ही एयरपोर्ट के दायरे में 8 – 12 किमी के बीच के क्षेत्र को ग्रीन जोन (Green Zone) कहा गया है, जिसमें 200 फीट तक के क्षेत्र में ड्रोन उड़ाने के लिए मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं होगी।

> वहीं ग़ैर-व्यावसायिक इस्तेमाल के लिहाज़ से माइक्रो और नैनो ड्रोनों को किसी भी तरह के पायलट लाइसेंस की ज़रूरत नहीं होगी।

> वहीं कुछ सेफ़्टी फ़ीचर्स जैसे ‘नो परमिशन-नो टेक-ऑफ’ (एनपीएनटी), रीयल-टाइम ट्रैकिंग बीकन, जियो-फेंसिंग आदि को लेकर सरकार भविष्य में नियमों को नोटिफाई करती नज़र आएगी, जिसके बाद ड्रोन निर्माताओं और संचालकों को इन नियमों का पालन करने के लिए 6 महीने का समय दिया जाएगा।

> देश में किसी भी तरह की ड्रोन ट्रेनिंग और टेस्टिंग को सरकार द्वारा अधिकृत (ऑथराइज्‍ड) ड्रोन स्‍कूल (Drone Schools) के द्वारा की दी जाएगी। इसके संबंध में डायरेक्‍टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) की तरफ से ट्रेनिंग संबंधित जरूरतों के बारे में बताया जाएगा। वहीं GCA इन ड्रोन स्‍कूलों की निगरानी करेगा और पायलट लाइसेंस भी ऑनलाइन मुहैया करवाएगा।

> अनुसंधान एवं विकास (R&D) संस्थाओं को सर्टिफिकेट, यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर, अनुमति और रिमोट पायलट लाइसेंस की कोई जरूरत नहीं होगी।

इन तमाम चीज़ों के साथ ही सरकार की इस नई नीति में ये भी सामने आया है कि ड्रोन का आयात DGFT ने नियंत्रण में होगा वहीं ड्रोन की कार्गो डिलीवरी के लिए ड्रोन कॉरिडोर को भी विकसित किए जाने की बात इन नियमों में कही गई है।

पर सरकार ने आगामी भविष्य को लेकर भी एक बड़ा ऐलान किया है, और नीति में स्पष्ट किया है कि एक ‘ड्रोन प्रमोशन काउंसिल’ बनया जाएगा जो बिजनेस फ्रेंडली नियमों की दिशा में काम करता नज़र आएगा।