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Zomato Q1 2021 (FY2022) Revenue Report: हाल में ही बंपर इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) दायर करने वाले फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato ने आईपीओ के बाद अपनी पहली तिमाही राजस्व रिपोर्ट पेश की है। इसके मुताबिक़ Zomato ने Q1, 2021 (साल की पहली तिमाही) में ₹356.2 करोड़ का शुद्ध घाटा दर्ज किया, जबकि Q4, 2020 में ये आँकड़ा ₹130.8 करोड़ ही था।

इस नई IPO लिस्टेड कंपनी द्वारा 30 जून 2021 को ख़त्म हुई साल की पहली तिमाही संबंधित रिपोर्ट में ये साफ़ नज़र आया कि इस घाटे के बढ़नें की मुख्य वजह Zomato के खर्चो में हुई बढ़ौतरी है।

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दिलचस्प ये है कि अगर पिछले साल इसी समान अवधि यानि Q1, 2020 के आँकड़ो को देखें तो तब कंपनी का शुद्ध घाटा क़रीब ₹99.8 करोड़ ही था।

Zomato Q1 Report (Hindi): कमाई के मुकाबले खर्चों में बढ़ोतरी

Zomato के अनुसार, कंपनी को पहली तिमाही में ₹844.4 करोड़ की आय प्राप्त हुई है, जो कि पिछले साल की इसी अवधि (Q1, 2020) में ₹266 करोड़ रही थी।

पर जैसा हमनें पहले हाई बताया इस तिमाही (Q1, 2021) में कंपनी का खर्च बढ़कर ₹1,259.7 करोड़ पहुँच गया है, जो पिछले साल जून तिमाही में ₹383.3 करोड़ ही था।

पर कुल राजस्व (संचालन + डिलीवरी चार्ज) Q4, 2020 में ₹920 करोड़ की तुलना में 26% बढ़कर इस तिमाही में ₹1,160 करोड़ रहा।

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Credits: Zomato Blog

Zomato का तर्क है कि Employee Stock Ownership Plan (ESOP 2021) प्रोग्राम के चलते इस तिमाही में कंपनी ने बहुत ज़्यादा फंड जारी किया है। और ESOP पर हुए इस खर्च के चलते ही कंपनी को इस तिमाही में अधिक घाटा हुआ है।

दिलचस्प रूप से Zomato को संस्थापक और सीईओ दीपेन्द्र गोयल ने एक लिखित बयान में कहा;

“पिछले साल, एक स्वतंत्र थर्ड पार्टी द्वारा किए गए गिग इकॉनमी वर्कर सर्वे में हमनें सबसे निचला स्थान प्राप्त किया था। तब हमनें उसको स्वीकार करते हुए यह माना था कि अभी हमें बहुत कुछ करने की जरूरत है और इसलिए हमने अपने डिलीवरी पार्टनर्स के लिए काम के माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में तेज़ी से प्रयास किए हैं और इसके लिए कई पहल शुरू की हैं।”

इसके लिए कंपनी ने अपने 3 लाख से अधिक डिलीवरी पार्टनर्स के लिए 15% की बढ़ोतरी के साथ एक बेहतर भुगतान तंत्र तैयार किया है।

साथ ही ये भी बताया गया कि हफ्ते में 40 घंटे से अधिक समय तक बाइक्स पर डिलीवरी करने वाले औसतन टॉप 20% जैमोटो डिलीवरी पार्टनर्स (Zomato Delivery Partners) को हर महीने ₹27 हजार से अधिक का भुगतान किया जाता है।