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उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) ने गुरुवार को ट्विटर इंडिया (Twitter India) के मैनेजिंग डायरेक्टर, मनीष माहेश्वरी (Manish Maheshwari) को लोनी [गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश] में एक बुजुर्ग व्यक्ति पर हमले के वायरल वीडियो के संबंध में समन / कानूनी नोटिस भेजा है।

बता दें इस नोटिस को प्राप्त करने के एक हफ़्ते के अंदर Twitter India के MD को बयान दर्ज कराने के लिए लोनी बॉर्डर थाने में बुलाया गया है।

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ये लीगल नोटिस Twitter India के MD को उस वायरल वीडियो को आधार बनाते हुए, प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए “सांप्रदायिक अशांति फैलाने” की अनुमति देने या कहें तो इसके ख़िलाफ़ कंपनी द्वारा कोई ठोस क़दम ना उठाए जाने को लेकर भेजा गया है।

इस नोटिस में कहा गया है कि

“कुछ लोगों द्वारा अपने अपने ट्विटर हैंडल को समाज में नफरत फैलाने के लिए एक टूल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है और ट्विटर कम्युनिकेशन इंडिया (Twitter Communication India) और ट्विटर इंक (Twitter Inc.) ने इसको रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की। कंपनी ने प्लेटफ़ॉर्म पर असामाजिक संदेशों को वायरल होने दिया।”

UP Police – Twitter India: क्या है मुद्दा?

ग़ौर करने वाली बात ये है कि कंपनी के ख़िलाफ़ ये पुलिस कार्यवाई ऐसे वक़्त में की जा रही है, जब Twitter India ने हाल ही में नए आईटी नियमों का पालन न करने के चलते देश में अपना ‘इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म’ या “बिचौलिये” (Intermediary) का स्टेटस/दर्जा खो दिया है।

जी हाँ! भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत ‘इंटरमीडियरी या बिचौलियों’ (Intermediary) के रूप में परिभाषित किए गए हैं।

लेकिन New IT Rules 2021 में ये प्रावधान था कि अगर सोशल मीडिया कंपनियों ने इनका पालन नहीं किया तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 (Section 79) के तहत मिलने वाला ‘बिचौलियों (Intermediaries)’ का स्टेटस ख़त्म कर दिया जाएगा।

असल में सेक्शन 79 के तहत सोशल मीडिया कंपनी ‘बिचौलिये’ के रूप में प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किए गए कंटेंट के प्रति कानूनी रूप से उत्तरदाई होने से छूट पाती है।

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पर क्योंकि अब Twitter भारत में Intermediary Platform का दर्जा खो चुका है, इसलिए प्लेटफॉर्म पर किसी भी तरह का कोई गैरकानूनी और अवैध कंटेंट पोस्ट होने पर कंपनी भी उसके प्रति क़ानूनी रूप से जवाबदेह है।

क्या है वायरल वीडियो का मामला?

उत्तर प्रदेश पुलिस ने जिस वायरल वीडियो की बात की है, उसमें एक धर्म विशेष से जुड़े बुजुर्ग पर गाजियाबाद में कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से हमला किए जाने के बाद, वह अपनी आपबीती बता रहें है।

इसके वायरल होते ही ट्विटर पर इसको साम्प्रदायिक रूख से भी देखा जाने लगा। लेकिन पुलिस ने इस वीडियो की प्राथमिक जांच के बाद इस मामले में साम्प्रदायिक एंगल होने से इनकार किया था।

और इसलिए यूपी पुलिस ने इसको साम्प्रदायिक रंग देने के आरोपों में ट्विटर, एक समाचार पोर्टल और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।