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टोरोंटो आधारित दिग्गज बैंक सिटी बैंक (Citibank) ने गुरुवार को ये ऐलान किया कि वह भारत सहित 13 देशों में अपना रिटेल बैंकिंग ऑपरेशन बंद करने जा रहा है। आसान भाषा में मतलब ये कि देश में अब सिटी बैंक इंडिया (Citibank India) की क्रेडिट कार्ड, जमा खाते आदि जैसी सुविधाएँ बंद हो रहीं हैं।

सिटी बैंक इंडिया (Citibank India) ने अपने रिटेल बैंकिंग व्यवसाय को बेचनें का फ़ैसला किया है, जिसमें कुल ₹66,507 करोड़ की अग्रिम राशि और ₹1,57,869 करोड़ की जमा राशि शामिल हैं।

लेकिन साफ़ कर दें कि सिटी बैंक इंडिया (Citibank India) अपने वेल्थ मैनेजमेंट बिज़नेस और इंस्टीट्यूशनल बिज़नेस (संस्थागत कारोबार) को बेचनें नहीं जा रहा है, बल्कि बैंक अब मुख्यतः अपने इन्हीं दो बिजनेसों में ध्यान देगा, क्योंकि पहले से ही ये दोनों बिज़नेस इसकी कमाई के दो सबसे बड़े ज़रिए रहें हैं।

भारत सहित जिन 12 देशों में सिटी बैंक (Citibank) अपना रिटेल बैंकिंग बिज़नेस बंद कर रहा है, उनमें चीन, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, बहरीन, कोरिया, इंडोनेशिया, रूस, वियतनाम, फिलीपींस, थाईलैंड, पोलैंड और ताइवान शामिल हैं।

सिटी बैंक (Citibank) द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, ऐसा लगता है कि अमेरिका के बाहर अपने बिज़नेस को लेकर कंपनी अब सिर्फ़ दुबई, हांगकांग, सिंगापुर और लंदन पर ध्यान केंद्रित करती नज़र आएगी।

क्या होगा Citibank India के कर्मचारियों और ग्राहकों का भविष्य?

बता दें कंपनी के LinkedIn पेज के अनुसार भारत में Citibank India के क़रीब 20,000 कर्मचारी हैं। लेकिन कंपनी ने साफ़ संकेत दिए हैं कि भारत में कोई भी छंटनी या ऑफ़िस बंद नहीं होंगे। संभावना यही है कि कंपनी अपने भारतीय रिटेल बैंकिंग संचालन किसी को बेच सकती है और डील के हिस्से के रूप में ख़रीदार को कंपनी के कर्मचारियों को भी बनाए रखना होगा।

इसके साथ ही बिजनेस को ख़रीदने के साथ ही साफ़ सा मतलब यह होगा कि मौजूदा ग्राहकों को सेवाओं की ज़िम्मेदारी नए ख़रीदार को सौंपी जाएगी।

कब हुआ था Citibank India का आग़ाज़?

सिटी बैंक इंडिया (Citibank India)ने 1902 में कोलकाता से भारत में अपना संचालन शुरू किया था। देश में आज क़रीब 12 लाख बैंक अकाउंट और 22 लाख क्रेडिट कार्ड अकाउंट के साथ, क़रीब 30 लाख रिटेल ग्राहकों को सेवाएं प्रदान की हैं।

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दिलचस्प ये है कि रिटेल क्रेडिट कॉर्ड बाज़ार में  लगभग 6% की बाजार हिस्सेदारी के साथ इसने देश में क़रीब 80 के दशक में क्रेडिट कार्ड और एटीएम जैसी चीज़ों को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।

ज़ाहिर है इसका कारण तो साफ़ है SBI, Axis Bank, ICICI Bank और HDFC Bank के मुक़ाबले Citibank India का रिटेल अकाउंट बिज़नेस उतना ख़ास नहीं चल रहा था और इसलिए कंपनी ने अब यह फ़ैसला किया है।

लेकिन अब एक बड़ा सवाल ये है कि बैंक का रिटेल बिज़नेस ख़रीदेगा कौन? इसको लेकर एक पहलू ये भी है कि नए खरीदार को भारतीय रिजर्व बैंक से भी अनुमति लेनी होगी और फ़िलहाल के समय को देखते हुए बैंक के लिए इतना बड़ा ख़रीदार तलाशना बेशक एक बड़ी चुनौती होगी।