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भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 24 मार्च को WhatsApp द्वारा लाई गई नई विवादित Privacy Policy को लेकर जाँच का आदेश दिया है, जो कि प्रथम दृष्टया ‘ना मानने योग्य’ और ‘यूज़र्स का शोषण’ करने वाली बताई जा रही हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़, दिलचस्प ये है कि CCI ने WhatsApp के ख़िलाफ़ इस जाँच को 60 दिनों में पूरा करने की उम्मीद जताई है।

असल में CCI की मानें तो WhatsApp ने नए Privacy Policy अपडेट की आड़ में अपने “शोषणकारी और बहिष्कृत आचरण” के माध्यम से प्रतिस्पर्धा अधिनियम (स्थिति का दुरुपयोग) की धारा 4 का उल्लंघन किया है।

ये क़दम मैसेजिंग ऐप के प्लेटफ़ॉर्म को इन-चैट पेमेंट फीचर और WhatsApp Pay को आगे बढ़ाने के मक़सद से उठाया गया हो सकता है।

इस बात में कोई शक नहीं है कि भारत WhatsApp के कुछ सबसे बड़े बाज़ारों में से एक है। ख़ास ये है कि WhatsApp के ख़िलाफ़ जाँच का आदेश देने को लेकर जनवरी में आई मीडिया खबरों आदि के आधार पर CCI ने इसका स्वतः संज्ञान लिया है।

इस बीच WhatsApp पहले ही इस विवादित पॉलिसी को 15 मई तक के लिए टाल चुका है। और कुछ ही दिनों पहले केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में ये अपील की थी कि अदालत WhatsApp को अपनी नई Privacy Policy लागू करने से रोके।

पर अब एंटीट्रस्ट नियामक CCI ने कहा कि यूज़र्स को शर्तों को अस्वीकार करने का विकल्प ना देना, डेटा शेयरिंग के लिए बाध्य करना आदि के लिए एक विस्तृत जांच की आवश्यकता है।

साथ ही CCI ने कहा कि ऐसा लगता है कि नई पॉलिसी Facebook की अन्य सेवाओं को यूज़र्स के बीच बढ़ावा देने और उनकी मार्केटिंग करने के लिए बनाई गई हैं।

नियामक का बार बार यही कहना रहा कि एक प्रतिस्पर्धी बाजार में उपयोगकर्ताओं के पास अपने व्यक्तिगत डेटा की शेयरिंग, उसके कंट्रोल आदि से जुड़े अधिकार सुरक्षित होने चाहिए, लेकिन शायद WhatsApp ऐसा नहीं चाहता है।

नई Privacy Policy से WhatsApp को क्या होगा फ़ायदा?

दरसल भले अब भी WhatsApp एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होने का दावा करता रहेगा, लेकिन ये चैट और उपयोगकर्ताओं के मेटाडेटा, लेनदेन डेटा, मोबाइल डिवाइस की जानकारी, IP ऐड्रेस और अन्य डेटा को Facebook आदि से शेयर करता रहेगा, ताकि ये देखा जा सके कि बिज़नेस के संदर्भ में लोगों की सोच क्या है? इसका इस्तेमाल Facebook टारगेट एडवर्टाइजमेंट के लिए करेगा।

ज़ाहिर है ये क़दम कंपनी अपने एक सपने को पूरा करने के लिए भी उठा रह है। असल में WhatsApp भारत के बेहद व्यापाक और अपार संभावनाओं से भरे ईकॉमर्स क्षेत्र में ख़ुद को एक Super App की तरह स्थापित करने के प्रयास करना चाहती है, और वह छोटे बिज़नेस आदि को कस्टमर डेटा एनालिटिक्स की भी सुविधा प्रदान करने का मन बना रही है।

आप भारतीय उपयोगकर्ताओं की नाराज़गी का आंदाज़ा इस बात से लगा सकते हैं कि WhatsApp द्वारा अपनी नई Privacy Policy की घोषणा के सिर्फ़ चार दिन के अंदर यानि 6 – 10 जनवरी के बीच ही भारत में Signal और Telegram ऐप्स ने कुल तौर पर 40 लाख से अधिक डाउनलोड दर्ज किए। वहीं इसी समय WhatsApp का डाउनलोड रेट 35% गिरकर क़रीब 13 लाख ही रहा था।

वहीं WhatsApp ने लोगों की नाराज़गी देखते हुए, प्लेटफ़ॉर्म पर इन-ऐप बैनर (WhatsApp In-App Banner) भी यूज़र्स को दिखाए, जिनमें लोगों को इन प्राइवेसी अपडेट के पहलू समझाने की कोशिश की जा रही थी।

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