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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 18 मार्च को लोकसभा में “वेहिकल स्क्रैपेज पॉलिसी (Vehicle Scrappage Policy) पेश कर दी की, जिसके साथ ही गडकरी ने देश भर में टोल प्लाज़ा (Toll Plaza / Toll Booth) में GPS सिस्टम की भूमिका को लेकर भी एक बड़ा ऐलान किया।

असल में लोकसभा में केंद्रीय परिवहन मंत्री ने कहा कि पुराने वाहनों को सड़कों से हटाना असल में पर्यावरण और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री दोनों के लिए लाभकारी है, क्योंकि इसके ज़रिए प्रदूषण और ऑटोमोबाइल कॉम्पोनेंट के दाम दोनों कम होंगे।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पुराने वाहनों को स्क्रैप सेंटर में भेज नए वाहनों को खरीदने पर रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स जैसी चीज़ों में छूट प्रदान की जा सकती है।

लेकिन इस बीच परिवहन मंत्री ने देश भर के टोल प्लाज़ा (Toll Plaza / Toll Booth) को लेकर भी एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि आने वाले 1 साल के भीतर पूरे देश से फ़िज़िकल टोल प्लाज़ा (Toll Plaza / Toll Booth) को हटाने का काम किया जाएगा और इनकी जगह जीपीएस आधारित वाहन मैपिंग (GPS Vehicle Mapping या GPS Imaging) सुविधा का इस्तेमाल किया जाएगा।

जी हाँ! सही सुना आपने कुछ ही सालों में आपको देश के सड़कों पर एक नई टेक्नोलॉजी नज़र आ सकती है, जिसके चलते आपको सड़क पर शायद ही बैरिकेड किया हुआ कोई टोल प्लाज़ा (Toll Plaza / Toll Booth) नज़र आए?

Toll Plaza की जगह होगा GPS-Imaging का इस्तेमाल

असल में इस नए GPS Vehicle Mapping या GPS Imaging जैसी तकनीक के चलते माना ये जा रहा है कि जब भी आप किसी एक चुनिंदा सड़क से अपने वाहन के साथ गुजरेंगे तो आपके वाहन की लोकेशन को मैप या कहें तो ट्रैक करके तय टोल की राशि आपके FASTag वॉलेट आदि से ऑटोमेटिक कट जाएगी।

इतना साफ़ कर दें कि इस GPS Vehicle Mapping या GPS Imaging तकनीक (या जो भी इसका नाम दिया जाए) को लेकर कोई आधिकारिक स्वरूप अभी तक पेश नहीं किया गया है।

लेकिन परिवहन मंत्री गडकरी ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा;

“मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि एक साल के भीतर देश के सभी भौतिक टोल बूथ हटा दिए जाएंगे। इसका मतलब ये है कि टोल कलेक्शन अब जीपीएस के माध्यम से होगा। जीपीएस इमेजिंग (वाहनों पर) के आधार पर ही टोल वसूला जाएगा।”

इसके साथ ही गडकरी जी ने कहा कि उन्होंने उन वाहनों के लिए पुलिस जांच का निर्देश दिया है जो FASTags का इस्तेमाल कर टोल का भुगतान नहीं करते हैं। असल में अगर वाहनों में FASTags फिट नहीं हैं तो टोल चोरी और जीएसटी चोरी की आशंका बढ़ जाती है।

आपको पता ही होगा कि FASTag असल में देश भर में टोल प्लाज़ा पर इलेक्ट्रॉनिक भुगतान करने की सुविधा है, जिसको सरकार द्वारा2016 में पेश किया गया था।

वहीं 16 फरवरी, 2021 के बाद से ही FASTag को टोल देने वाले वाहनों के लिए अनिवार्य कर दिया गया था, और बिना FASTag वाले वाहनों को देश भर में अब दोगुना टोल टैक्स देना पड़ रहा है।

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The Chairman, NHAI, Shri Deepak Kumar launching the Mobile App My FASTag and FASTag Partner, in New Delhi on August 17, 2017. (Photo: Wikimedia Commons)

असल में इस इलेक्ट्रॉनिक टैग को अनिवार्य करने से वाहनों को भी आसानी से टोल प्लाज़ा से गुजरने में मदद मिलती है और भुगतान की राशि को लेकर भी सरकार के पास पारदर्शिता आती है।

लेकिन परिवहन मंत्री के अनुसार आज भी क़रीब 93% वाहन ही FASTag का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं बाक़ी के 7% वाहनों को देश भर में दोगुने टैक्स का भुगतान करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्होंने FASTag सुविधा का इस्तेमाल शुरू नहीं किया है।

इसके साथ ही गडकरी ने कहा कि नए वाहनों में FasTags लगे हुए हैं, जबकि सरकार ने कहा है कि पुराने वाहनों के लिए मुफ्त में FASTags दिया जाएगा।