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WhatsApp की नई प्राइवेसी पॉलिसी (Privacy Policy) को लेकर विवादों का सिलसला थमता नज़र नहीं आ रहा है। अब एक नई ख़बर के अनुसार भारत की केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) से अपील की है कि वह WhatsApp पर इस नई प्राइवेसी पॉलिसी को लागू करने पर रोक लगाए।

जी हाँ! असल में ये ख़बर ANI के एक ट्वीट के ज़रिए सामने आई है, जिसके अनुसार अनुसार WhatsApp को अपनी नई गोपनीयता नीति और सेवा शर्तों को लागू करने से रोकने के लिए सरकार ने से क़दम उठाया है।

असल में 17 मार्च को लोकसभा में आईटी और संचार राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने बताया था कि भारत सरकार ने Facebook के मालिकाना हक़ वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp को अपनी नई विवादित प्राइवेसी पॉलिसी की समीक्षा करने के लिए कहा है।

असल में इस साल की शुरुआत में ही WhatsApp ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव के लिए नई अपडेट पेश की थी, जिसके बाद से ही प्लेटफ़ॉर्म विवादों में घिरता चला गया, क्योंकि इस नई पॉलिसी के तहत प्लेटफ़ॉर्म पर Facebook के साथ डेटा शेयरिंग तक के आरोप लगे।

वहीं WhatsApp में यह कहा था कि कंपनी यह सुनिश्चित करती है कि प्लेटफॉर्म पर मैसेज एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं और रहेंगें और कोई भी किसी के भी निजी मैसेज को नहीं पढ़ सकता है।

Delhi High Court WhatsApp Case: 15 मई के बाद लागू होनी है पॉलिसी

लेकिन विवादों का सिलसिला बढ़ता देख इस इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लिकेशन ने नई अपडेट के लिए पहले 8 जनवरी की समय सीमा तय की थी, जिसको बाद में 15 मई तक के लिए टाल दिया गया है।

ये विवाद इसलिए भी इतना बढ़ा क्योंकि WhatsApp ने यूज़र्स को इस नई पॉलिसी को अस्वीकार करने का कोई विकल्प तक नहीं दिया है। और यही कारण है कि बीते कुछ समय से भारतीय उपयोगकर्ताओं ने Signal और Telegram जैसे विकल्पों के इस्तेमाल की ओर रूख किया है।

हाल ही में ही प्लेटफ़ॉर्म पर इन-ऐप बैनर (WhatsApp In-App Banner) भी यूज़र्स को दिखाए जा रहें हैं, जिनमें लोगों को इन प्राइवेसी अपडेट के पहलू समझाने की कोशिश की जा रही है।

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ख़बरों के मुताबिक़ WhatsApp यूजर्स को नई पॉलिसी को 15 मई तक एक्सेप्ट करना होगा। कंपनी ने शुक्रवार को यहाँ तक कहा कि इसने उसने केंद्र सरकार को अपने इस प्लान के बारे में सूचित कर दिया है और यह भी आश्वासन दिया है कि कंपनी देश के लोगों की निजी चैट की प्राइवेसी को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

नई Privacy Policy से क्या है WhatsApp को फ़ायदा?

दरसल भले अब भी WhatsApp एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होने का दावा करता रहेगा, लेकिन ये चैट और उपयोगकर्ताओं के मेटाडेटा, लेनदेन डेटा, मोबाइल डिवाइस की जानकारी, IP ऐड्रेस और अन्य डेटा को Facebook आदि से शेयर करता रहेगा, ताकि ये देखा जा सके कि बिज़नेस के संदर्भ में लोगों की सोच क्या है? इसका इस्तेमाल Facebook टारगेट एडवर्टाइजमेंट के लिए करेगा।

ज़ाहिर है ये क़दम कंपनी अपने एक सपने को पूरा करने के लिए भी उठा रह है। असल में WhatsApp भारत के बेहद व्यापाक और अपार संभावनाओं से भरे ईकॉमर्स क्षेत्र में ख़ुद को एक Super App की तरह स्थापित करने के प्रयास करना चाहती है, और वह छोटे बिज़नेस आदि को कस्टमर डेटा एनालिटिक्स की भी सुविधा प्रदान करने का मन बना रही है।