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भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने विदेशों से होने वाले लेनदेन को तेज बनाने के मक़सद से ब्लॉकचेन तकनीक (Blockchain Technology) का उपयोग करने के लिए अमेरिका स्थित बैंक JP Morgan के साथ पार्टनरशिप की है।

ईटी की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस समझौते के चलते SBI के ग्राहकों की ट्रांजैक्शन लागत और लेनदेन पूरा होने में लगने वाले समय में कमी आ सकती है।

ख़ासकर अन्य देशों से होने वाले लेनदेन के समय में कुछ घंटों की कमी आने की उम्मीद है। इसके चलते ग्राहकों को सीमा-पार भुगतान करने के लिए महज़ कुछ स्टेप्स से ही गुजरना पड़ेगा।

SBI & JP Morgan: क्या होता है Blockchain Tech?

आपको बता दें ब्लॉकचेन असल में एक तरह का डिजिटल लेन-देन होता है, जो किसी पेमेंट को ब्लॉकचेन के रूप  में कंप्यूटर सिस्टम के एक पूरे नेटवर्क पर डुप्लिकेट और डिस्ट्रीब्यूट किया जाता है।

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आसान भाषा में कहें तो जहाँ एक तरफ़ पारंपरिक डेटाबेस डेटा को एक टेबल के रूप में स्टोर करता है, वहीं ब्लॉकचेन (Blockchain) असल में ब्लॉक के रूप में डेटा को एक चेन की तरह क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर में स्टोर करता है। जानकार मानते हैं कि इस तकनीक से बड़ी मात्रा में डेटा को रिकॉर्ड करने के लिए कम पैसे ख़र्च होते हैं और सप्लाई चेन को व्यवस्थित रखने और धोखाधड़ी को कम करने में भी मदद मिलती है।

SBI करेगा Blockchain तकनीक Liink का इस्तेमाल

अब आते हैं SBI और JP Morgan के बीच हुई इस साझेदारी पर, जिसके तहत SBI इस वैश्विक बैंक की ब्लॉकचेन तकनीक (Blockchain Technology), Liink का उपयोग करता नज़र आएगा।

SBI व अन्य वित्तीय संस्थानों, कॉरपोरेट्स और फिनटेक कंपनियों के साथ पीयर टू पीयर (P2P) नेटवर्क पर भुगतान से संबंधित जानकारी के आदान-प्रदान के लिए Liink का उपयोग किया जाएगा।

SBI फ़िलहाल लेनदेन पूरा करने के लिए 600 विदेशी बैंकों के साथ कम्यूनिकेशन बैंकिंग का एक विस्तृत नेटवर्क रखता है। वर्तमान में, SBI ग्राहक SBI Express Remit, डिमांड ड्राफ्ट, टेलीग्राफिक / वायर ट्रांसफर और व्यक्तिगत चेक आदि जैसी सुविधाओं के साथ लेनदेन कर सकतें हैं।

आपको याद दिला दें कि इस महीने की शुरुआत में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ब्लॉकचेन तकनीकि के देश में इस्तेमाल के लिए एक मसौदा तैयार था।

इस मसौदे के तहत संपत्ति के रिकॉर्ड रखने, डिजिटल प्रमाण पत्र, बिजली वितरण, हेल्थ रिकॉर्ड, सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसे विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए ब्लॉकचेन के इस्तेमाल की संभावनाओं को तलाशना ही मक़सद था। 

वहीं इस साल जनवरी में, सरकार को NITI Aayog की तरफ़ से भी एक सिफ़ारिश प्राप्त हुई थी, जिसके तहत राज्य द्वारा संचालित सेवाओं जैसे फ़र्टिलायज़र सब्सिडी व शैक्षिक प्रमाण पत्र को बाँटने जैसे कामों में भी इस तकनीक के इस्तेमाल का सुझाव दिया गया था।

अब देखना ये है कि तेज़ी से डिजिटल सेवाओं की ओर रूख करता भारत, कितने सालों में ऐसी तमाम तकनीकों को अपना पाता है। वहीं ग़ौर करने वाली बात ये है कि जिस ब्लॉकचेन तकनीक के इस्तेमाल को बल देने के प्रयास हो रहें हैं, उसी पर आधारित बिटकॉइन (Bitcoin) को लेकर सरकार इतनी आश्वस्त नज़र नहीं आती है, जिसके अपने तर्क और आधार हैं, जो काफ़ी हद तक सही कहे जा सकते हैं। लेकिन इससे भिन्न राय रखने वालों की भी एक बड़ी संख्या है।