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भारत में Amazon से प्रवर्तन निदेशालय (ED) का साया इतनी आसानी से हटता नज़र नहीं आ रहा है। पहले से ही उद्योग और आंतरिक व्यापार को बढ़ावा देने के लिए विभाग, DPIIT के अनुरोध पर ED के घेरे में नज़र आ रहे Amazon India पर अब ये जाँच एजेंसी और मज़बूती से शिकंजा कसती नज़र आ सकती है।

दरसल भारत के विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) नियमों के कथित उल्लंघनों के साथ ही और Amazon India द्वारा प्लेटफ़ॉर्म पर कुछ चुनिंदा सेलर्स को ग़लत ढंग से बढ़ावा देने के मामले को लेकर अब कंपनी की मुसीबतें बढ़ने के आसार नज़र आने लगे हैं।

हाल में Reuters की एक रिपोर्ट में ये आरोप लगाए गए थे कि जिन सेलर कंपनियों में Amazon की प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी है, कंपनी उन्हें अपने ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म पर जानबुझ कर ग़लत तरीक़े से बढ़ावा देती है।

वहीं पिछले ही महीने DPIIT ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के साथ-साथ भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भी कन्फेडरेशन ऑफ़ इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) द्वारा की गई चार शिकायतों पर कार्यवाई करने की सिफ़ारिश की थी।

DPIIT ने दोनों एजेंसियों (ED और RBI) को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के नियमों और भारत की FDI पॉलिसी के उल्लंघन को लेकर ई-कॉमर्स दिग्गज Amazon और Flipkart के खिलाफ “आवश्यक कार्रवाई” करने के लिए कहा था।

इस बीच हाल ही में आरोपों के बारे में बात करते हुए ED के एक वरिष्ठ सूत्र ने Reuters को बताया कि ये मामला उनके लिए पूरी तरह से नया नहीं है, और अब वो 2012 से 2019 के बीच Amazon के आंतरिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए छपी नई रिपोर्ट के “निष्कर्षों” को लेकर भी जांच करेंगे।

असल में इस नई रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 की शुरुआत में कंपनी की वेबसाइट पर बेचे गए कुल सामानों में लगभग एक तिहाई हिस्सेदारी अकेले क़रीब 33 Amazon विक्रेताओं (सेलर्स) की ही रही।

और इस दौरान अकेले दो विक्रेताओं, Cloudtail और Appario ने ही प्लेटफ़ॉर्म पर हुई कुल बिक्री के ज़रिए कमाई का 35% हिस्सा कमाया। ग़ौर करने वाली बात ये है कि इन दोनों कंपनियों में Amazon की अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी है।

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असल में दिसंबर 2018 में FDI नियम में बदलाव को अधिसूचित करने वाले Press Note 2 के मुताबिक़ विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियाँ अपने प्लेटफ़ॉर्म पर उन विक्रेताओं को प्रोडक्ट नहीं बेचने दे सकती हैं, जिनमें वह किसी भी तरह से हिस्सेदारी रखती हैं।

वहीं इस नियम से बचने के लिए Amazon ने तुरंत ही इन दोनों विक्रेता कम्पनियों में अपनी हिस्सेदारी को घटाकर 24% कर दिया था, ताकि ये कंपनियाँ मूल रूप से Amazon Group का हिस्सा ना रहें और अपने समान प्लेटफ़ॉर्म पर बेंच सकें।

इस बीच Amazon India के प्रमुख अमित अग्रवाल ने सामने आई आरोप लगाने वाली इस रिपोर्ट को “अपूर्ण और तथ्यात्मक रूप से गलत” बताया है।

इसके साथ ही यह भी सामने आया है कि Amazon India ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया है कि Amazon सभी भारतीय क़ानूनों का पालन करता है। ख़ैर! अब देखने वाली बात ये है कि इस दिग्गज़ कंपनी के ख़िलाफ़ लगे कथित आरोपों को लेकर क्या भारतीय जाँच एजेंसियाँ कोई सख़्त रवैया अपनाती हैं या नहीं?