kerala-kfon-gives-free-internet-to-20-lakh-families

इस बात में कोई शक नहीं है कि इंटरनेट अब लोगों की बुनियादी ज़रूरत बनता जा रहा है और केरल सरकार ने अब इसको बात को समझा भी है। और शायद यही वजह है कि लोगों को मुफ्त इंटरनेट प्रदान करने के मक़सद से केरल सरकार ने अपने केरल फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क (KFON) पहल की शुरुआत की है।

आपको बता दें इसका प्रस्ताव साल 2019 में भी पेश किया गया था और एक बार ये प्रोजेक्ट पूरा होने पर राज्य के 14 जिलों में 35,000 किमी ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछ जाएगा।

इस प्रोजेक्ट के पहले फ़ेज़ में अस्पतालों, ऑफ़िसों, स्कूलों और घरों में उपयोगकर्ताओं को ये सहूलियत प्रदान करने की कोशिश की जा रही है, जिसको फ़िलहाल एर्नाकुलम, पठानमथिट्टा, त्रिशूर, अलाप्पुझा, तिरुवंतपुरम और कोल्लम जैसी जगहों पर लॉन्च किया जाएगा।

इस बीच केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के अनुसार ये नेटवर्क गरीब घरों से जुड़े लगभग 20 लाख लोगों को सुविधा प्रदान करेगा और उन्हें डिजिटल दुनिया की सहूलियत हासिल करने में मदद करेगा।

लेकिन दिलचस्प ये है कि सरकार जहाँ एक ओर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मुफ़्त में इंटरनेट की सुविधा पहुँचाती नज़र आएगी वही मुख्यमंत्री जी ने इसका भी आश्वासन दिया कि सरकार का लक्ष्य राज्य के हर घर में सस्ती दरों पर इंटरनेट की सुविधा देने का है।

इसके साथ ही राज्य भर में इस नेटवर्क के ज़रिए क़रीब 30,000 सरकारी संस्थानों को भी इंटरनेट की पहुँच दी जाएगी। असल में अब तक कहा जाता है कि राज्य के सभी सरकारी ऑफ़िसों में से सिर्फ़ 10% ऑफ़िसों में ही हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी की सुविधा मौजूद है।

और तो और अपनी इस अनूठी पहल के साथ केरल अब भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है जो ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से गरीबी रेखा के नीचे (BPL) नागरिकों को KFON प्रोजेक्ट के ज़रिए मुफ्त ब्रॉडबैंड इंटरनेट की पेशकश करेगा।

PM WANI से अलग है केरल की KFON योजना

ये साफ़ कर दें कि केरल सरकार का ये KFON प्रोजेक्ट केंद्र सरकार द्वारा पेश की गई PM WANI योजना से अलग है। PM WANI योजना के तहत केंद्र सरकार पब्लिक वाई-फाई के ज़रिए लोगों को इंटरनेट से जोड़ने का काम कर रही है।

हाँ! KFON प्रोजेक्ट को आप थोड़ा बहुत BharatNet स्कीम की तर्ज़ पर देख सकते हैं, जिसके तहत ग्राम पंचायतों और गांवों ऑप्टिकल फाइबर के ज़रिए इंटरनेट से जोड़ा जा रहा है।

आपको बता दें दिसंबर 2020 में केंद्र सरकार ने देश भर में अपनी सार्वजनिक वाई-फाई हब या कहें तो हॉटस्पॉट मुहैया करवाने के लिए सार्वजनिक वायरलेस नेटवर्क या वाई-फाई नेटवर्क स्थापित करने की मंजूरी दी थी। और इसको ही PM WANI का नाम दिया गया था।

इसके पहले सितंबर 2019 में केरल हाईकोर्ट में इंटरनेट को एक बुनियादी मानव अधिकार का दर्जा दिया था। हालाँकि इसके पहले ही केरल सरकार ने 20 लाख गरीब परिवारों को मुफ्त इंटरनेट प्रदान करने की अपनी योजना की घोषणा कर दी थी।

उस समय केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने Twitter पर कहा था;

“इंटरनेट कनेक्शन को मूल नागरिक आधिकर बनाया जाना चाहिए। केरल कैबिनेट ₹1548 करोड़ की KFON योजना के ज़रिए राज्य में हर घर को इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करने की मंजूरी दे चुकी है और इसमें क़रीब 20 लाख आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मुफ़्त में ही ये सुविधा प्रदान की जाएगी।”

केरल सरकार का लक्ष्य तब दिसंबर 2020 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का था। लेकिन कोरोना mahamaari के चलते इस प्रोजेक्ट में देरी हुई।