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देश में ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए एक बड़ी ख़बर है। दरसल उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) गुरुवार को प्रस्तावित ई-कॉमर्स नीति पर मंत्रालयों से चर्चा करने की योजना बना रहा है। असल में ET द्वारा प्रकाशित के रिपोर्ट एक अनुसार यह बात सामने आयी है।

इसमें भारतीय उपयोगकर्ताओं के डेटा को विदेशों में भी स्टोर करने वाली कम्पनियों का समय-समय पर ऑडिट और एक नियामक की स्थापना का प्रस्ताव शामिल है।

इस बीच इस ई-कॉमर्स नीति को लेकर कंपनियों द्वारा लोगों के डेटा को स्टोर, उपयोग, स्थानांतरण, प्रॉसेस और विश्लेषण करने के मुद्दे पर भी चर्चा हो सकती है। आपको बता दें विभिन्न मंत्रालयों ने एक नियामक की भूमिका और उपभोक्ता डेटा की सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर अपनी अपनी चिंताएँ ज़ाहिर की थी।

इस बीच माना ये जा रहा है कि इन नीतियों के बाद Flipkart और Amazon जैसी बड़ी कंपनियों को अपने मॉडल में कई प्रमुख बदलाव करने पड़ेंगें।

आपको बता दें 2018 के प्रेस नोट 2 के बाद, Amazon को अपने प्लेटफ़ॉर्म के सेलर्स Cloudtail India Pvt. Ltd. और Appario Retail Pvt. Ltd. में अपनी हिस्सेदारी कम करनी पड़ी थी। लेकिन अगर नए नियम और सख़्त होते हैं तो हो सकता है कि शायद Amazon को इन दोनों कंपनियों के साथ अपनी पूरी हिस्सेदारी ख़त्म करनी पड़े।

इस बीच कंपनियों की मानें तो FDI नीति में किसी भी बड़े बदलाव का SMBs और स्टार्टअप्स आदि में व्यापाक प्रभाव देखने को मिल सकता है। और ज़ाहिर है क़ानून जो भी होंगें कंपनियों को पूरे सम्मान के साथ उसका पालन भी करना पड़ेगा।

आपको बता दें बीते काफ़ी समाय से ये ई-कॉमर्स नीति को लेकर एक मसौदा तैयार करने की कोशिशें हो रहीं हैं, जिस पर पिछले साल सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों से चर्चा भी की थी।

इस बीच माना जा रहा है कि भारतीय रिज़र्व बैंक के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, कॉरपोरेट, वित्त और कृषि मंत्रालय भी इस बैठक में भाग ले सकते हैं। इस बीच माना ये जा रहा है कि इन्वेंट्री मार्केटप्लेस को लेकर नए नियम और सख़्त हो सकते हैं।

अब देखना ये है कि ये नए नियम अगर लागू होते हैं तो इंडस्ट्री इसको लेकर कैसी प्रतिक्रिया देगी? और क्या देश में Flipkart और Amazon जैसी कंपनियों को अपने बिज़नेस मॉडल में बड़े बदलाव करने की ज़रूरत होगी?