फ़ूड डिलीवरी कंपनी Zomato ने बताया है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में उसका राजस्व पिछले साल की तुलना में तेजी से बढ़ा है, और अब यह ₹2,743 करोड़ के आँकड़े को पार कर चुका है।

लेकिन दीपेंदर गोयल की अगुवाई वाली कंपनी अभी भी लाभ में नहीं है क्योंकि राजस्व के साथ ही साथ इसी वित्त वर्ष में कंपनी का घाटा भी बढ़कर ₹2,386 करोड़ हो गया है। और कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2019-20 में अपने कुल खर्चों के ₹5006 करोड़ होने का अनुमान लगाया है।

गुड़गांव आधारित इस कंपनी का शेयर कैपिटल भी ₹272 करोड़ से बढ़कर ₹422 करोड़ हो गया है। और कंपनी ने इस वित्तीय वर्ष में $660 मिलियन का फंडिंग राउंड भी दर्ज किया है।

वैसे 2020 का साल लॉकडाउन आदि के चलते डिलीवरी सेक्टर आदि के लिए काफ़ी मिला-जुला रहा, हालाँकि कुछ महीनों के लिए ज़रूर व्यवसाय काफ़ी हद तक प्रभावित रहा, लेकिन उसके बाद रिकवरी भी हुई। दरसल Tonguestun Food Network Private Limited के तहत चल रहे Zomato के फ़ूड@वर्क बिज़नेस को भी काफ़ी नुकसान हुआ।

इसके साथ ही Zomato ने इसी वित्त वर्ष में Uber के भारतीय फ़ूड डिलीवरी बिज़नेस का भी $206 मिलियन में अधिग्रहण किया और इसके बदले Uber ने Zomato में 9.9% हिस्सेदारी हासिल की।

इस बीच कंपनी ने अपने नुक़सान को कम करने के लिए कई स्तर पर छटनियाँ भी की, इसके पीछे कंपनी ने लागतों को कम करने और बाजार की आवश्यकताओं के आधार पर कर्मचारियों की संख्या रखने का हवाला दिया।

लेकिन अब COVID-19 के प्रकोप से बाहर आते हुए फिर से कम्पनी के राजस्व में वृद्धि एक अच्छा संकेत है, जो इसको इसके IPO प्लान में भी मदद करेगा नज़र आएगा। जी हाँ! असल में कई अटकलों के मुताबिक़ Zomato इस साल IPO दायर कर सकता है।

इस बीच कंपनी का विदेशी मुद्रा प्रवाह ₹270 करोड़ और आउटगो ₹252 करोड़ रहा। इस बीच कंपनी द्वारा जारी किए गए दस्तावेज़ बताते हैं कि कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले सालों में कंपनी के कुल कारोबार में सुधार होता नज़र आ सकता है और साथ ही कंपनी ख़ुद को भविष्य के बाजार के लिए तैयार करने के लिए रिसर्च आदि में भी निवेश करेगी।