‘मेड इन इंडिया’ के तहत भारत सरकार पिछले कुछ समय से काफ़ी नए नए प्रयास करते नज़र आती रही है। और अब इसी कड़ी में देश की सरकार ने दिग्गज़ Samsung और Apple के तीन प्रमुख कांट्रैक्ट निर्माण पार्टनर्स को अगले पाँच सालों में देश में स्मार्टफोन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए $6.65 बिलियन का प्रोत्साहन देने का वादा किया है।

इसके साथ ही सरकार ने 16 अन्य कंपनियों को भी इस प्रोत्साहन राशि का वादा किया है। आपको बता दें इन कंपनियों ने अगस्त में प्रोत्साहन प्रोग्राम के लिए आवेदन किया था।

मंगलवार शाम को दिए गए एक बयान में, भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कहा कि ये कंपनियां अगले पांच सालों में $143 बिलियन से अधिक मूल्य के स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों का देश में ही उत्पादन करेंगी।

इस बीच इसके बदले में भारत उन्हें आगामी पांच वर्षों में स्थानीय रूप से उत्पादित वस्तुओं की अतिरिक्त बिक्री पर 4% से 6% तक का प्रोत्साहन प्रदान करेगा।

ज़ाहिर है सरकार भारत के भीतर निर्माण और निर्यात क्षमताओं में सुधार कर अधिक स्थानीय नौकरियों का निर्माण करना चाहती है। भारतीय मंत्रालय की मानें तो स्थानीय रूप से बने प्रोडक्ट्स का लगभग 60% निर्यात किया जाएगा।

इस बीच मंत्रालय ने आगे यह भी कहा कि अगले पांच सालों में 200,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे और इसके साथ ही 600,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने की भी बात कही गई।

लेकिन इस क़दम के साथ ही भारत प्रमुख स्मार्टफोन निर्माता के रूप में इस क्षेत्र में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बाजार के चलते चीन को कादी टक्कर देता भी नज़र आएगा। दरसल Apple के मुख्य साझेदारों जैसे Foxconn, Wistron और Pegatron द्वारा भारत में अपनी स्थानीय विनिर्माण क्षमताओं का विस्तार करने में तेज़ी लाना अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभदायक साबित होगा।

आपको बता दें Wistron ने क़रीब तीन साल पहले भारत में कुछ iPhones मॉडल्स को असेंबल करना शुरू किया था। और इसके बाद Foxconn और Pegatron भी भारत में उत्पादन शुरू करने को लेकर बेहद उत्साहित हो गए।

इस बीच मंत्रालय ने इस घोषण के दौरान कहा;

“Apple और Samsung मोबाइल फोन की वैश्विक बिक्री राजस्व में क़रीब 60% हिस्सेदारी रखते हैं और इस पहल से देश में इनके द्वारा निर्माण की गतिविधियों में कई गुना वृद्धि होने की उम्मीद है।”

“इस बीच इन कंपनियों ने भी विश्व स्तरीय निर्माण गंतव्य के रूप में भारत को पहचाना है और इससे देश को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की अपनी पहल को लेकर भी लाभ मिलेगा।”

वहीं भारतीय कंपनियाँ जैसे Lava, Bhagwati (Micromax), Padget Electronics, UTL Neolyncs और Optiemus Electronics को भी प्रोत्साहन राशि को लेकर मंजूरी मिली है।

लेकिन इस सूची से चीनी स्मार्टफोन निर्माता Oppo, Vivo, OnePlus और Realme जैसों का नाम गया है, क्योंकि इन्होंने इस प्रोग्राम के लिए आवेदन नहीं किया था।

आपको बता दें इन चीनी स्मार्टफोन विक्रेताओं ने फ़िलहाल लगभग 80% भारतीय स्मार्टफ़ोन बाजार में अपनी घाक जमा रखी है। दरसल Samsung जो कभी देश में सबसे लोकप्रिय स्मार्टफोन ब्रांड था, अब वह कुछ सालों से Xiaomi और Vivo से कड़ी टक्कर पा रहा है और वजह है क़ीमत।