हाल ही Google द्वारा अचानक नियमों को बदलने और Play Store पर Paytm को हटाने जैसी घटनाओं के बाद से अब भारतीय स्टार्टअप्स ने इसके वैकल्पिक प्लेटफॉर्म की तलाश शुरू कर दी है। दरसल Paytm के विजय शेखर शर्मा और PolicyBazaar के यश दहिया सहित कई संस्थापकों के एक समूह ने स्वदेशी ऐप स्टोर की दिशा में चर्चा को लेकर भारत सरकार के साथ एक बैठक की है।

दरसल अमेरिकी सर्च इंजन दिग्गज के खिलाफ ये क़दम उसके द्वारा कुछ ही दिनों पहले इन-ऐप खरीदारी पर 30% कमीशन के नियम को सख़्त करने के बाद उठाए जा रहें हैं। पर इतना ज़रूर है कि Google की मानें तो इससे सिर्फ़ और सिर्फ़ Play Store पर मौजूद 3% ऐप ही प्रभावित होंगी।

दरसल भारतीय ऐप डेवलपर लगातार ही Google द्वारा भारतीय स्मार्टफोन बाज़ार में उसके एकाधिकार जैसी स्थिति के दुरुपयोग की शिकायत करते रहें हैं। और शिकायतें यहाँ तक हैं कि भारत में Google कई Apps पर अपने पेमेंट गेटवे, Google Pay के इस्तेमाल के लिए मजबूर कर रहा है। लेकिन फिर से Google ने स्पष्ट किया कि उपयोगकर्ता अन्य UPI पेमेंट सेवाओं के साथ-साथ Google Pay का भी उपयोग कर सकते हैं।

इस बीच भारतीय संस्थापकों का यह समूह भारतीय रिज़र्व बैंक और भारतीय वित्त मंत्रालय के समक्ष Google की नई कमीशन नीतियों का मामला उठाने की योजना बना रहा है। इसको लेकर CCAvenue के संस्थापक विश्वास पटेल ने कहा,

“सरकार को निश्चित रूप से इस पर कदम उठाना होगा और आगे बढ़ कर आना होगा। अगर बॉर्डर पर राजनीतिक तनावों के कारण किसी प्रकार का प्रतिबंध लगाया जा सकता है , तो एक भारतीय ऐप स्टोर सभी के लिए लाभदायक साबित होगा।”

दरसल संस्थापकों के समूह का मानना ​​है कि एक भारतीय ऐप स्टोर Google के Play Store और Apple के App Store के एकाधिकार को तोड़ सकेगा, जैसे कि NPCI ने वीVISA और Mastercard के खिलाफ RuPay लाकर भुगतान बाज़ार में एक बड़ा फेरबदल किया था।

वहीं Matrimony.com के Murugavel Janakiraman ने ऐप न्यूट्रैलिटी पर जोर दिया। उन्होंने कहा;

“अगर भारत में नेट न्यूट्रैलिटी है, तो हमारे पास ऐप न्यूट्रैलिटी क्यों नहीं हो सकती? सरकार द्वारा निगरानी किए गए निकाय ऐप की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित कर सकते हैं।”

CCAvenue के विश्वास पटेल ने आगे कहा कि बैठक में शामिल सभी ने इन मुद्दों और शिकायतों की पहचान करने के बाद, अगला कदम उठाने और समाधान के लिए सही प्राधिकरण से संपर्क करने का फ़ैसला किया है। इन प्राधिकरणों में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय शामिल हैं, जिनके साथ वे भारतीय ऐप स्टोर की स्थापना पर चर्चा करेंगे।

यह समूह असल में Google की नई 30% कमीशन नीति को लेकर भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग, राष्ट्रीय भुगतान निगम और केंद्रीय डायरेक्ट टैक्स बोर्ड से भी मुलाक़ात कर सकता है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार समूह ने अपने हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर पर लॉबी बनाने के बारे में भी विचार किया है।

वहीं एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि इंडस्ट्री में से किसी ने अभी तक उनसे उनसे संपर्क नहीं किया है, लेकिन अगर वे सरकार से संपर्क करते हैं तो हम इस मामले पर पूरा ध्यान दिया जाएगा और उचित क़दम उठाए जाएँगें।