इंसान पिछले कई सालों से मंगल पर जीवन को बसाने की दिशा में काफ़ी गंभीरत से काम करते हुए इसके सपने देख रहा है। लेकिन अब धरती के इस बेहद निकटवर्ती पड़ोसी ने अचानक कुछ दिलचस्प खोज के साथ सकारात्मक संकेत दिए हैं। जी हाँ! असल में शोधकर्ताओं को वहाँ जीवन के होने के कुछ संकेत मिलें हैं।

और यक़ीन मानिए अगर ऐसी संभावनाएँ हैं तो यह मानव इतिहास में आजतक की सबसे बड़ी खोज हो सकती है। आपको बता दें वैज्ञानिकों ने शुक्र पर फॉस्फीन गैस की खोज की है, जो एक तरह से जीवन के होने की ओर इशारा करती है।

जिन्हें केमिस्ट्री आदि में बहुत अधिक रुचि व जानकारी नहीं है, हम उन्हें बता दें हमारे पास ऐसे कई ग्रह हैं जिन्हें ‘गैस के ग़ुब्बारे’ के रूप में ही जाना जाता है, तो फिर अचानक इस खोज से इतना उत्साहित होने के क्या मयाने हैं? दरसल ऐसा इसलिए है क्योंकि फॉस्फीन का होना जीवन के एक निश्चित संकेत के रूप में देखा जाता है और यह गैस सामान्यतः सिर्फ़ वहीं मौजूद होती है, जहाँ जीवन के रूप कोई प्रजाति मौजूद हो।

लेकिन हमनें ‘निश्चित संकेत’ का ज़िक्र किया, दरसल ऐसा इसलिए क्योंकि फॉस्फीन की उपस्थिति कभी भी झूठी सकारात्मक संभावना नहीं हो सकती है। अगर वहाँ का फॉस्फीन है, तो मतलब वहाँ जीवन भी है।

अब यह सुनकर आप ज़रूरी रोमांचित हुए होंगें? लेकिन यही पर सिक्के का दूसरा पहलू भी है। असल में फॉस्फीन के बारे में हमारे पास मौजूद सभी डेटा और सिद्धांत पृथ्वी पर जीवन की हमारी समझ के आधार पर बने हैं। और वास्तव सौरमंडल की बात करने पर इसको लेकर व्यापक रूप से कोई रिसर्च नहीं की गई है और इसलिए संभावना है कि यह अटकलें ग़लत भी हो सकती हैं।

वैज्ञानिकों की मानें तो फॉस्फीन केवल अवायवीय जीवन की मौजूदगी द्वारा निर्मित होता है, लेकिन यह एक गलत परिकल्पना भी हो सकती है।

लेकिन स्वाभाविक है फ़िलहाल हम सब वैज्ञानिकों के मत के साथ ही जाना पसंद करेंगें क्योंकि धरती पर किए गये ही सही लेकिन यह आधार वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित ज़रूर हैं। और कहीं न कहीं यह ऐसे भी एक और अच्छा मौक़ा हो सकता है कि इस नए नज़रिए के साथ शुक्र की ओर रिसर्च आदि में तेज़ी आयी जाए और चीजों का विस्तारित अध्ययन शुरू किया जाए।

यह इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि शुक्र को हमेशा से ही पृथ्वी के जुड़वां ग्रह के रूप में देखा गया है, और ऐसे में वहाँ जीवन के संकेत मिलना ब्रह्मांड में जीवन की परिकल्पना के दिशा में और भी अधिक रोमांचित करता है।

दरसल अगर यह अटकलें सच भी साबित होती हैं तो यह तो ज़ाहिर है कि वहाँ जीवन अभी भी इतना विकसित नहीं है और ऐसे में हमारी किसी भी सभ्यता को परेशान किए बिना एक नए ग्रह पर अस्तित्व पाने की सोच और भी मज़बूत हो सकती है।