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आप सबको शायद याद हो कि देश में COVID-19 के दौरान जब पूरा देश घर में रहने और घर से ही कामकाज करने के लिए मजबूर हो गया था, ऐसे में देश में अचानक से इंटरनेट की माँग काफ़ी बढ़ गई थी।

पुराने ही संसाधनों के साथ इस बढ़ी माँग को पूरा करने के चक्कर में देशभर में इंटरनेट स्पीड में कमी भी दर्ज की गई है। लेकिन अब ऐसा लगता है कि इंटरनेट स्पीड में आई वह कमी बीते समय की बात बनने जा रही है।

दरसल मोबाइल डेटा डाउनलोड स्पीड, जो अप्रैल के पहले हफ़्ते में COVID-19 के पहले के हालातों की तुलना में लगभग 21% (राष्ट्रीय औसत) तक गिर गई थी, जुलाई के बीच में उसने वापस से वही स्तर प्राप्त कर लिया है। और इतना ही नहीं बल्कि अगस्त में इसमें मामूली बढ़ौतरी भी देखने को मिली है।

लेकिन इतना ज़रूर साफ़ कर दें कि लॉकडाउन के दौरान कुल तौर पर डाउनलोड का अनुभव अलग अलग स्थानों पर अलग अलग रहा है।

टियर -2 और टियर -3 शहरों में स्पीड में गिरावट अधिक देखी गई, जिसका कारण भी साफ़ था कि दूरसंचार ऑपरेटरों के पास पर्याप्त नेटवर्क संबंधी बुनियादी ढांचा मौजूद नहीं था, जबकि कई लोग बड़े शहरों से इन जगहों पर लौट आए थे और माँग बढ़ गई थी।

OpenSignal की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ शहरी उपयोगकर्ताओं ने 30 मार्च से 12 अप्रैल के बीच औसत डाउनलोड स्पीड में 16% की गिरावट दर्ज की, वहीं टियर -2 और 3 शहरों में उपयोगकर्ताओं ने क्रमशः 25% और 23% की अधिक की गिरावट दर्ज की।

देश की राजधानी दिल्ली में डाउनलोड स्पीड में जहाँ 9% वहीं हैदराबाद और बेंगलुरु में 3% की गिरावट देखने को मिली, जो 6 से 12 अप्रैल के बीच दर्ज की गई।

लेकिन नासिक, सोलापुर, सूरत और फरीदाबाद में यही स्पीड क्रमशः 30%, 34%, 27% और 22% तक गिर गई। बता दें ऑपरेटरों ने अधिकतम गति को कम करके आउटेज के जोखिम को घटाने के प्रयास किए थे।

पर अब 27 जुलाई से 2 अगस्त के दौरान राष्ट्रीय औसत स्पीड COVID-19 के पहले की तुलना में 1% अधिक हो गई है, जो दिल्ली (35%), मुंबई (33%), और चेन्नई (31%) में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज करती नज़र आई।

इतना ही नहीं बल्कि टियर-2 और 3 शहरों में भी नेटवर्क स्पीड में सुधार हुआ है, लेकिन धनबाद, कानपुर और सोलापुर जैसी जगहों पर अभी भी डाउनलोड स्पीड में 21%, 13% और 14% की गिरावट जारी है।

ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) के महानिदेशक एस. पी. कोचर ने कहा कि कंपनियों ने व्यावसायिक क्षेत्रों से नेटवर्क की प्राप्ति सुनिश्चित की ताकि वर्क फ़्रोम होम और ऑनलाइन शिक्षा जैसी डेटा-संचालित सेवाओं की माँग को हर क्षेत्रों में पूरा किया जा सके।