देश भर में चीन के विरोध की लहर अभी भी बरक़रार है और आलम यह है कि भारतीय इलेक्ट्रिकल उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री ने पिछले कुछ दिनों में चीनी कंपनियों के कई ऑर्डर को रद्द करना शुरू कर दिया है और साथ ही अब इस्तेमाल लायक़ कच्चे माल की सोर्सिंग के लिए ये कंपनियाँ नयी जगह तलाश रही हैं।

ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ ये कंपनियां मुख्य रूप से इलेक्ट्रिकल डिस्ट्रीब्यूशन और ट्रांसमिशन के चीनी ऑर्डर कैन्सल करने के साथ उच्च लागत के बावजूद अन्य देशों की ओर रुख कर रही हैं।

दरसल यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित Vocal-For-Local अभियान के बाद शुरू हुआ है। इस महीने इस अभियान का असर इलेक्ट्रिकल गियर आयात इंडस्ट्री पर भी नज़र आने लगा है। हाँ! इतना ज़रूर है कि इस दिशा में यह ध्यान रखते हुए क़दम बढ़ाया जा रहा है कि इस अहम भारतीय इंडस्ट्री में किसी तरह की कोई दिक्कत पैदा न हो।

रिपोर्ट कि माने तो इसको लेकर Indian Electrical & Electronics Manufacturers’ Association के अध्यक्ष आर के चुघ ने कहा कि उद्योग अब तक कच्चे माल, उप-असेंबली और कुछ अन्य चीज़ों के लिए चीन से भी तैयार माल बड़ी संख्या में आयात कर रहा था।

वहीं इस एसोसिएशन के महानिदेशक सुनील मिश्रा के अनुसार अब यह इंडस्ट्री वैकल्पिक स्रोतों पर शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू कर रही है, क्योंकि चीन को आपूर्ति चेन से जल्द से जल्द बाहर करना देश और इंडस्ट्री दोनों के हित में है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार 100% आत्मनिर्भर भारत की ओर कूच करने में अभी शायद थोड़ा समय लगे, इसलिए फ़िलहाल इंडस्ट्री जापान, ताइवान, कोरिया, जर्मनी आदि जैसे विश्वसनीय और मित्र देशों का रूख कर रही है।

आपको बता दें पारंपरिक बिजली क्षेत्रों में काम कर रही चंडीगढ़ स्थित ईपीसी कंपनी Hartek Group ने हाल ही में चीन से अपने कंट्रोल पैनलों और अन्य राज्य उपयोगिताओं के लिए कुछ सामानों का ऑर्डर रद्द कर दिया है।

वहीं रिपोर्ट के हवाले से यह सामने आया है कि कंपनी के अनुसार, इस क़दम से कंपनी के संचालन में प्रभाव पड़ना तय है, लेकिन लम्बें समय तक इंडस्ट्री और देश के हित को देखते हुए यह ज़रूरी क़दम है।