भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में दिग्गज निवेशक कंपनी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी Sequoia Limited Partners ने अब भारत और दक्षिण पूर्व एशिया केंद्रित ₹1.35 बिलियन के दो नए फ़ंड बनाए हैं। दिलचस्प यह है कि इन नए फ़ंड्स में से एक $525 मिलियन का ‘वेंचर फंड’ है और दूसरा $825 मिलियन का ग्रोथ फंड।

आपको बता दें इसकी अटकलें कुछ दिनों पहले से ही लगाई जाने लगीं थीं। दरसल VCCircle की एक रिपोर्ट में नियामक फ़ाइलिंग के हवाले से यह बताया गया था कि Sequoia ने भारत के लिए क़रीब $1.25 बिलियन का नया निवेश हासिल किया है।यह अटकलें अभी फैल ही रही थीं कि अब Sequoia ने ख़ुद सामने आकार इसकी अधिकारिक घोषणा कर दी।

Sequoia Capital India के मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेंद्र जे. सिंह ने अपने एक LinkedIn पोस्ट में लिखा;

“हम Sequoia के पार्टनर्स के आभारी हैं, जिन्होंने सामूहिक रूप से दो नए Sequoia India फंडों के लिए $1.35 बिलियन का निवेश किया, जिनमें $525 मिलियन का वेंचर फंड और $825 मिलियन का ग्रोथ फंड शामिल है।”

Sequoia India फ़िलहाल सीड से लेकर ग्रोथ फ़ंड तक में निवेश कर रहा है, और इसलिए ये Sequoia ईकोसिस्टम में सभी स्तर के संस्थापकों के बीच प्रासंगिक बना हुआ है।”

ज़ाहिर तौर पर Sequoia भारत के अंदर सबसे पुरानी और सफल निवेश फर्मों में से एक रही है। इस निवेश फर्म द्वारा निवेश हासिल करने वाले कई स्टार्टअप्स आज काफ़ी बड़ा नाम बैन चुकें हैं जिनमें मुख्यतः OYO, Byju’s, Ola Cabs जैसे कई नाम शामिल हैं। वहीं भारत में इसके द्वारा शुरुआती दौर में लगाए गए कुछ बड़े दांव में Cafe Coffee Day, Star Health, Micromax, Hector Beverages आदि शामिल हैं।

लेकिन एक सच यह भी है कि Sequoia Capital मुख्यतः काफी हद तक लेट/ग्रोथ स्टेज कैपिटल के साथ ही जुड़ता नज़र आया है। वहीं इस फर्म ने हाल ही में अपने एक्सेलेरेटर प्रोग्राम ‘Surge’ के साथ शुरुआती स्तर के स्टार्टअप्स में निवेश करने की पहल का आग़ाज़ किया है। Surge असल में Sequoia का एक “रैपिड स्केल-अप” प्रोग्राम है, जिसमें यह वीसी फर्म कंपनी निर्माण कार्यशालाओं, वैश्विक यात्राओं आदि को लेकर कुछ “असाधारण संस्थापकों” की कम्यूनिटी को $1 मिलियन से $2 मिलियन तक का सीड फ़ंड प्रदान करती है।

इस बीच शैलेंद्र जे. सिंह ने यह भी कहा कि नौकरी खत्म हो गई है, और असली काम अब शुरू हो रहा है, निवेश हासिल करना सफलता का पैमाना नहीं है, और यह निवेश Sequoia को अपने पार्टनर्स के भरोसे के लिए जवाबदेह बनाता है।

ज़ाहिर सी बात है कि यह फ़ंड ऐसे वक़्त में आया है जब बाज़ार को इसकी सबसे अधिक ज़रूरत है। फ़िलहाल बाज़ार से निवेशक अपने हाथ पीछे ही खींचते नज़र आ रहें हैं, और उसका कारण आप सब जानते हैं।

इतना ही नहीं बल्कि भारतीय बाजार भी अब पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी बन चुका है, ज्यादातर कंपनियों को हर साल राजस्व बढ़ने के बावजूद भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस बीच शैलेंद्र सिंह ने कहा

“पिछले एक दशक में भारत और साउथ-ईस्ट क्षेत्र में स्टार्टअप इकोसिस्टम में बहुत अधिक वृद्धि हुई है। निवेशक भी स्टार्टअप्स में बड़ी मात्रा में पूंजी निवेश करने के लिए सामने आते नज़र आ रहे थे। इसके परिणामस्वरूप स्टार्अअप्स के बीच थोड़े समय के लिए होड़ काफ़ी तेज हो गयी थी। लेकिन नए हालतों में डाउन साइकल, कॉस्ट कटिंग और नेगेटिव सेंटीमेंट बढ़ से गए हैं। इस दौरान स्टार्टअप बंद होने की दर में भी वृद्धि देखी जा रहीं है, कई संस्थापकों, निवेशकों और स्टार्टअप कर्मचारियों ने कम्पनियों का साथ छोड़ना शुरू कर दिया है।”

इससे बाज़ार में फिर से फ़ंडिंग को लेकर प्रतिस्पर्धा पैदा हो गयी है, ताकि कंपनियों को मार्जिन में कटौती करने और अपना संचालन करते रह पाने की सहूलियत मिल सके।

लेकिन हम आपका ध्यान एक और ओर ले जाना चाहेंगें। दरसल भले Sequoia का रिकॉर्ड भारत में काफ़ी अच्छा भी रहा हो, लेकिन इसके पोर्टफोलिया में भी असफलत स्टार्टअप की लिस्ट है। इसमें से कुछ नाम है Housing और Freecharge, लेकिन इतना तो साफ़ है कि अब कंपनी निश्चित रूप से भविष्य के दांव लगाते समय इन नामों से मिली सीख उन ध्यान में रखेगी।

लेकिन दिलचस्प यह है कि इन क्षेत्रों में उपभोक्ता इंटरनेट कंपनियों के लिए अभी भी सुनहरा समय है। इस क्षेत्र का भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में संयुक्त रूप से जीडीपी में $14 ट्रिलियन का योगदान रहा है, और इन क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 2030 तक 1.5 बिलियन पार करने की संभावना है।

स्वाभाविक रूप से यह चीज़ें इन क्षेत्रों को टेक्नोलॉजी के आगामी दशक का सबसे अहम बिंदु बना देती हैं। और यही वजह भी है कि Sequoia जैसी कंपनियाँ लगातार अपने आज के कदमों से भविष्य का दांव खेलती नज़र आ रहीं हैं।