ईकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में Venture Intelligence के हवाले से यह सामने आया है कि 2020 के पहले छह महीनों में स्टार्टअप्स डील 31% घटकर 272 ट्रांजैक्शन पर आ गई, वहीं इसी अवधि में पूँजी निवेश 11% घटकर $4.1 बिलियन ही रह गया। आपको बता दें यह आँकड़े पिछले साल की समान अवधि से तुलनात्मक रूप से दर्शाए गये हैं।

वहीं एक अनुमान यह भी है कि COVID-19 के चलते बने हालातों और चीन से निवेश पर लगी रोक की दोहरी मार के चलते अगली दो तिमाहियों में ये आँकड़े और भी ख़राब हो सकते हैं।

सबसे दिलचस्प चीज़ जो सामनें आई वह यह कि विचार और अवधारणा के प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप में निवेश को लेकर भारी धक्का लगा है, जिसमें $2 मिलियन के सौदों वाली डील में 43% की गिरावट आयी और सिर्फ़ 98 डील ही दर्ज की गई।

वहीं $2-25 मिलियन के लेनदेन वाली डील में 26% तक की गिरावट देखी गई। लेकिन बड़े सौदे मतलब $25 मिलियन से अधिक वाली डील का आँकड़ा 37 सौदों के साथ स्थिर रहा।

इस बीच हुए सबसे बड़े सौदों में EdTech Byju’s और एंटरप्राइज़ सॉफ्टवेयर प्लेयर Postman का $150 मिलियन का सौदा शामिल रहा।

अधिकांश निवेशकों ने अप्रैल और मई में नए निवेशों को रोक दिया, और कई बड़े सौदे जो पिछले साल ही क्लोज़ हुई थी, उनमें भी मूल्यांकन 10-20% की गिरावट के साथ वापस से आँकलन होता पाया गया।

इस बीच जानकारों की मानें तो 2020 की दूसरी छमाही में ये आँकड़े और भी बदतर हो सकतें हैं, क्योंकि ऑनलाइन लेंडिंग से लेकर मोबिलिटी जगत तक अभी काफ़ी समय तक COVID-19 महामारी के चलते परेशान नज़र आ सकतें हैं।

लेकिन साथ ही साथ निवेशकों का यह भी कहना है कि साल 2020 में स्टार्टअप्स को बस किसी तरह अपना संचालन बनाए रखने के बारे में सोचना चाहिए, बाक़ी आगामी समय में जल्द ही हम फिर से मजबूत निवेशकों और ऑनलाइन खिलाड़ियों के समर्थन में वृद्धि देख सकतें हैं।

लेकिन ख़ास बात यह है कि इस महामारी के बीच भी एडटेक, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर और सॉफ्टवेयर जैसे कुछ क्षेत्रों में निवेशकों की दिलचस्पी देखी जा रही है क्योंकि महामारी के कारण नाटकीय रूप से इन क्षेत्रों में बढ़त दर्ज की गई है।

जैसे अभी हाल ही में Unacademy द्वारा फरवरी में $500 मिलियन की राशि जुटाने के बाद अब $1.2 बिलियन से अधिक वैल्यूएशन पर पूंजी जुटाने के प्रयास किए जा रहें हैं। लेकिन इतना भी ज़रूर है कि पसंदीदा स्टार्टअप क्षेत्रों जैसे फिनटेक, ई-कॉमर्स और फ़ूड डिलीवरी आदि में माँग के लिहाज़ से 30-60% तक की गिरावट है।

इस बीच उम्मीद यही की जा रही है कि Sequoia Capital India और Lightspeed Venture Partners

जैसे कुछ बड़े निवेशक आगामी महीनों में भारत केंद्रित फ़ंड क्लोज़ कर सकतें हैं। इस बीच Bain & Co की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में अभी भी निवेश की काफ़ी संभावनाएँ हैं, जो 2018 में भी $6.1 बिलियन के आँकड़े से बढ़कर 2019 में $7 बिलियन तक पहुँच गया था।