ख़बरों के मुताबिक़ मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली Reliance Industries और Reliance Jio Platforms अब अपने एग्रीटेक JioKrishi ऐप के लिए Facebook के साथ अहम भागीदारी करने को लेकर विचार कर रहें हैं।

आपको बता दें JioKrishi ऐप फ़ार्म-टू-फ़ोक सप्लाई चेन सपोर्ट के साथ-साथ डेटा एनालिटिक्स की सुविधाएँ प्रदान करत है।

Reliance ने  हाल ही में किसानों के खेत संबंधी आंकड़ों के आधार पर सटीक खेती आदि के पैमानें पर उन्हें मदद देने के लिए JioKrishi ऐप लॉन्च किया था।

ऐप फ़िलहाल अपने बीटा मोड में है, और यह किसानों को बुवाई, सिंचाई और फसलों को आदि को लेकर सही समय और तकनीक के लिहाज़ से उन्हें मदद की पेशकश करने के लिए डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करत नज़र आएगा। ज़ाहिर है कंपनी का दावा है कि इससे किसानों को उत्पादकता और उपज में बढ़ौतरी हासिल हो सकेगी।

आपको बता दें बिज़नेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार Reliance ने का फ़ार्म-टू-फ़ोक बिज़नेस रिटेल में आवश्यक सब्जियों आदि की रिटेल माँग का क़रीब 50% सोर्सिंग इसको फसल से स्टोर तक 12-घंटे की डिलीवरी साइकल में समेटने का प्रयास करेगा।

स्वाभाविक रूप से इससे उसके मौजूदा किराने के कारोबार Reliance Fresh और JioMart के साथ-साथ अन्य स्टोर्स को भी फायदा होगा। आपको बता दें कम्पनी का दावा है कि अभी भी वह क़रीब सीधे किसानों से ही 77% फल आदि ले रही है।

आपको बता दें भले Reliance बहुत लंबे समय से एग्रीटेक सेगमेंट में नहीं है, लेकिन इसके प्रतिद्वंद्वी इसकी मात्रा का केवल 10% उत्पादन कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार Reliance ने Swiggy, Flipkart और Dunzo जैसे किराना डिलीवरी और हाइपरलोकल प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी की है।

वहीं आपको बता दें एग्री सप्लाई चेन के अन्य स्टार्टअप्स में Ninjacart, Intello Labs, Farmpal, Zomato’s Hyperpure, Bigbasket, Jumbotail, WayCool, DeHaat, KrishiHub और Kisan Network जैसे नाम शुमार हैं।

लेकिन ज़ाहिर तौर पर COVID -19 महामारी ने पूरे सप्लाई चेन नेट्वर्क और क्षमता को हिला कर रख दिया है और साथ ही साथ इसकी कई मौजूदा ख़ामियों को भी उजागर किया है।

दरसल पूरे नेट्वर्क में रियल टाइम अपडेट और कई अन्य आँकड़ो की कमी साफ़ नज़र आती है और ऐसे में ही सामग्री की बर्बादी और उत्पादों की खराब गुणवत्ता अक्सर परेशानी का सबब बन जाती हैं, जो राजस्व को भी नुक़सान पहुँचाती हैं।

आपको बता दें एक रिसर्च के मुताबिक़  कुल उत्पादन का लगभग 30% -40% सप्लाई चेन के विभिन्न स्तरों पर बर्बाद हो जाता है। जिसकी वझ से हर साल क़रीब ₹2 लाख करोड़ का नुक़सान होता है।

इस बीच आपको यह भी बताना चाहेंगें कि Reliance ने इसके लिए Escorts, Microsoft और Bosch

से भी साझेदारी की है ताकि सटीक खेती तकनीक विकसित करने में और कुशलता अर्जित की जा सके। इसके साथ ही ट्रैकटर निर्माण की योजनाओं में बीज की रोपाई से लेकर, टाइलिंग और छिड़काव के लिए मॉडल पर काम भी चल रहा है।

इतना ही नहीं ऐसा कहा जा रहा है कि 65K हेक्टेयर से अधिक भूमि के लिए 38.5K से अधिक किसानों को कृषि-योग्य कौशल में प्रशिक्षित किया गया है।