इस बात से तो शायद आप भी सहमत हों कि ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम या “GPS” आज के समय में लोकेशन शब्द का पर्याय बन गया है।

स्मार्टफोन से लेकर कंप्यूटर और यहां तक ​​कि ऑटोमोटिव सहित कई डिवाइस GPS के माध्यम से लोकेशन सुविधाएँ दे रही हैं। लेकिन काम ही लोग जानते हैं कि GPS जो पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले सैटेलाइटों में से एक है, का मालिकाना हक़ अमेरिका के पास है।

लेकिन क़रीब पिछले एक दशक से कई देशों ने अमेरिका के एकमात्र वर्चस्व को देखते हुए इसके नकारात्मक पहलुओं के बारे में सोचा और शायद इसलिए नतीजतन जापान, भारत, ब्रिटेन जैसे देशों ने अपने स्वयं के लोकेशन सैटेलाइट बनाए और सफलतापूर्वक स्थापित किए। और अब इस लिस्ट में चीन ने भी अपना नाम शुमार कर दिया है।

जी हाँ! मंगलवार को चीन ने इस संदर्भ में अपने अंतिम सैटेलाइट का सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया, इस प्रकार से चीन ने भी अब अंतरिक्ष में ‘Beidou’ नामक अपनी जियो लोकेशन सैटेलाइट को स्थापित कर दिया।

दरसल चीन के पीपल्स डेली ने लॉन्च के बारे में बताया;

“सिचुआन प्रांत के Xichang Satellite Launch Center में पहले चरण में आठ इंजन और Long March 3B रॉकेट रॉकेट के चार बूस्टर के साथ 19 मंजिला उपग्रह आसमान में ओर बढ़ गया”

इन-ऑर्बिट टेस्टिंग की अवधि के बाद नया उपग्रह औपचारिक संचालन शुरू करेगा और अन्य Beidou उपग्रहों की ही तर्ज़ पर काम करेगा, इससे दुनिया भर के उपयोगकर्ताओं अब चीन के नेविगेशन सैटेलाइट की सुविधा हासिल कर पाएँगें।

आपको बता दें यह अंतरिक्ष यान China Academy of Space Technology द्वार बनाया गया था, जो सरकार के मालिकाना हक़ वाले China Aerospace Science and Technology Corp. की ही सहायक कम्पनी है। बता दें यह कम से कम 12 वर्षों के लिए ऑर्बिट में काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

इस सफल लॉंच के साथ ही आपको बता दें कि चीनी मीडिया ने दावा किया कि अब क़रीब 70% चीनी हैंडसेटों में Beidou उपग्रहों से सिग्नल को प्रॉसेस करने का काम शुरू हो जाएगा।

आपको बता दें साल 2000 में चीन ने एक प्रयोगात्मक प्रणाली स्थापित करने के लिए पहले दो Beidou उपग्रहों को लॉन्च किया था। फिर 2003 और 2007 में एक और दो टेस्टिंग उपग्रहों को ट्रायल रन में शामिल होने के लिए भेजा गया था। साथ ही पहले दो तीसरी पीढ़ी के उपग्रह नवंबर 2017 में लॉन्च किए गए थे।

पिछले दो वर्षों में Beidou की अंतरिक्ष-आधारित तैनाती प्रक्रिया में काफ़ी तेजी आई, जिसमें 17 प्रक्षेपणों में 28 उपग्रहों को ऑर्बिट में भेजा गया है।

आपको बता दें अब तक कुल 59 उपग्रहों, जिनमें पहले चार टेस्टिंग के लिए शामिल हैं, को Xichang से Long March 3B पर लॉन्च किया गया है।

लेकिन दिलचस्प यह भी है कि हाल ही में भारत ने भी इसी तरह के लोकेशन उपग्रहों के “NAViC” का निर्माण किया है। भारत के ISRO ने भी स्मार्टफोन के चिपसेट के भीतर NAViC के लिए बिल्डिंग सपोर्ट शुरू करने हेतु विश्व स्तर पर स्मार्टफोन निर्माताओं के साथ काम करना शुरू कर दिया है।