काफ़ी समय बाद फिर से स्टार्टअप जगत से जुड़ी निवेश संबंधी ख़बरें अपनी जगह बनाने लगी हैं। और अब इसी कड़ी में सिंगापुर आधारित वेंचर कैपिटल फर्म Beenext ने दो नए फ़ंड को क्लोज़ करने का ऐलान किया है।

जी हाँ! दरसल कम्पनी ने यह फ़ंड कुल मिलाकर $160 मिलियन डॉलर (क़रीब ₹1,213 करोड़) का रखा है, जिसमें से एक तिहाई हिस्सा भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

आपको बता दें पहला फंड, Beenext Emerging Asia Fund नाम से बनाया गया है, जिसमें $110 मिलियन की राशि जुटाई गयी है और भारत को इसमें से क़रीब $55 मिलियन आवंटित करने का अनुमान है, बाक़ी की राशि दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में उपयोग में लायी जा सकती है।

आपको बता दें ईटी में प्राप्त रिपोर्ट्स के अनुसार यह फंड मुख्य रूप से ईकॉमर्स, फिनटेक, हेल्थ-टेक, एग्री-टेक, एडटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा-संचालित टेक्नोलॉजी डोमेन जैसे क्षेत्रों में निवेश करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

वहीं बात करें दूसरे फंड यानि शेष बची राशि के $50 मिलियन के इस्तेमाल की तो इसको विशेष रूप से जापान में SaaS व्यवसायों में निवेश करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

Beenext के संस्थापक Teruhide Sato असल में अपनी Tokyo Stock Exchange लिस्टेड जापानी ईकॉमर्स और निवेश कंपनी Beenos के लिए भी जाने जाते रहें हैं, और दिलचस्प यह है कि वह 2015 से ही भारत में निवेश कर रहें हैं।

आपको बता दें उनके द्वारा निवेश हासिल करने वाले भारतीय स्टार्टअप्स की सूची में BharatPe, Open और Instamojo जैसे नाम शुमार हैं। आपको बता दें अब तक यह भारत में क़रीब 72 निवेश कर चुकें हैं।

इसके साथ ही Beenos ने अलग से भी Droom, NoBroker और Zilingo जैसे स्टार्टअप्स में बतौर निवेशक जुड़ चुका है।

इस बीच रिपोर्ट के अनुसार Beenext ने यह नया फ़ंड दक्षिण पूर्व एशिया सहित अमेरिकी संस्थागत निवेशकों, जापानी कॉरपोरेट और ग्लोबल फ़ैमिली ऑफ़िसों आदि से हासिल किया है। और अब Beenext के लिए भारत फ़िलहाल एक सबसे बड़े देशों में शुमार होगा, जिसमें वह निवेश करने आ रहा है।

लेकिन सबसे ख़ास बात यह है कि यह ऐसे समय में आया है जब COVID-19 महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है, और दुनिया भर के देश इसके बाद भी लॉकडाउन आदि के चलते अर्थव्यवस्था की मार सहने को मजबूर हैं।

COVID-19 का प्रभाव कुछ ऐसा है कि भारत में निजी इक्विटी और वेंचर कैपिटल डील क़रीब क़रीब बंद सी हो गई हैं, और निवेशक अब फ़िलहाल नए निवेश से कतराने से लगें हैं।