Jio Platforms लगातार सूर्खियों में बना हुआ है, वजह एक ही है, बस बदल रहें हैं तो नाम, वो भी निवेशकों के। बाक़ी फ़ंडिंग की रक़म भी ऐसी की बिलियन का आँकड़ा तो साधारण सा लगने लगा है।

और अब एक बार फिर से Jio Platforms उसी वजह से ख़बरों में वापस आ गया है और इस ने निवेशक के तौर पर शुमार हुआ है, अबू धाबी का Mubadala Investments, जिसने कम्पनी में क़रीब $1.2 बिलियन का निवेश करने का ऐलान किया है। जी हाँ! Facebook, General Atlantic, Silver Lake, Vista Equity, KKR जैसे निवेशकों से पैसे हासिल करने के बाद यह  कम्पनी का लगभग एक महीने में हासिल किया गया 6वां निवेश होगा।

आपको बता दें, Facebook की फ़ंडिंग के बाद से ही अगले फ़ंडिंग दौरों में Jio Platforms की वैल्यूएशन भी $65 बिलियन पहुँच चुकी है। आपको बता दें अब इसी वैल्यूएशन पर Mubadala ने Jio Platforms में 1.85% की हिस्सेदारी प्राप्त की है।

इस बीच मुकेश अंबानी की कोशिशें काफ़ी रंग लाती नजर आ रहीं हैं और इसलिए Jio Platforms द्वारा हासिल किए गये कुल निवेश का आँकड़ा अब $10 बिलियन के पार चला गया है। और इस तरह से Jio Platform पूरी दुनिया में एक निजी कम्पनी के तौर पर इतना निवेश हासिल करने वाली चुनिंदा कम्पनियों में से एक भी बन गई है।

आपको बता दें अब तक कंपनी ने अपने सभी निवेशों को मिलकर कुल 19% तक की हिस्सेदारी बेच दी है।

वहीं बात करें Mubadala की तो यह वैश्विक तौर पर कुल $229 बिलियन से अधिक की संपत्ति का प्रबंधन करता है और अबू धाबी निवेश प्राधिकरण के बाद दूसरा सबसे बड़ा राज्य निवेशक है।

इस बीच RIL के चेयरमैन और एमडी, मुकेश अंबानी ने कहा;

“मुझे खुशी है कि विश्व के कुछ बेहतरीन और परिवर्तनकारी निवेशकों में शुमार, Mubadala ने भारत के डिजिटल विकास को दुनिया भर में एक मिसाल बनाने के हमारे लक्ष्य में हमारा साथ देने का फ़ैसला किया। अबू धाबी के साथ अपने लंबे अरसे के संबंधों के चलते मैंने व्यक्तिगत रूप से UAE की अर्थव्यवस्था को जोड़ने और विविध रूप उसपर प्रभाव डालने की Mubadala की क्षमता को देखा है।”

इस बीच आपको बता दें Reliance Industries Limited जो असल में Jio Platforms की पैरेंट कम्पनी है, फ़िलहाल एक बड़े Rights Issues भो दर्ज किए हैं। दरसल क़रीब $7 बिलियन के एक निर्धारित मुद्दे के विरुद्ध कंपनी को $10.6 बिलियन की बोलियाँ प्राप्त हुईं हैं।

आपको बता दें एक गैर-वित्तीय संस्थान के लिए पिछले 10 वर्षों में Rights के मुद्दे के पैमानें पर यह अब तक का सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है।