Zomato आज के बार फिर से सुर्ख़ियों में है, और वजह है कंपनी का एक निर्णय। जी हाँ! दरसल Zomato ने अब अपने फ़ूड डिलीवरी बिज़नेस का नेतृत्व कर रहे ‘मोहित गुप्ता’ को प्रमोशन देते हुए कंपनी के ‘सह-संस्थापक’ का दर्जा प्रदान किया है।

आपको बता दें अब मोहित गुप्ता सहित Zomato के कुल चार ‘सह-संस्थापक’ होंगे। इनमें मूल सह-संस्थापक दीपिंदर गोयल, COO गौरव गुप्ता, गुंजन पाटीदार और अब मोहित गुप्ता शामिल हैं।

मौजूदा हालतों को देखते हुए आपको कंपनी का यह निर्णय पेचीदा जरुर नजर आ सकता है। असल में कोरोना वायरस महामारी के चलते भारत में सबसे अधिक प्रभावित होने वाले उद्योगों में से एक फ़ूड डिलीवरी बिज़नेस भी है। आलम यह है कि देश में COVID-19 के हालातों के पहले से संचालन करने वाले करीब 30% रेस्टोरेंट आदि बंद होनें की कगार पर हैं।

इसका सीधा प्रभाव Swiggy और Zomato जैसी कंपनियों पर पड़ा है, हालात ऐसे हैं कि यह दोनों कंपनियाँ अब अपने मूल व्यवसाय से अलग ग्रोसरी डिलीवरी और शराब की होम डिलीवरी जैसी सुविधाओं के सहारें अपने संचालन को बरक़रार रखते नजर आना चाहती हैं। इस बीच इतना जरुर है कि सह-संस्थापक के रूप में अब मोहित गुप्ता कंपनी के विकास को लेकर नये आत्मविश्वास के साथ नजर आ सकतें हैं।

इस बीच आपको बता दें, कंपनी के कर्मचारियों को भेजे गए एक ईमेल में, दीपिंदर गोयल ने कहा,

“मोहित गुप्ता हमारे साथ सबसे पहले जुड़कर कंपनी की नींव रखने वालें लोगों में से एक हैं, और उन्होनें पिछले दो वर्षों में कंपनी को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जब मैंने कंपनी ने करीब एक साल पहले फाउंडर्स प्रोग्राम की शुरुआत की थी, तो मैंने तब भी उनकें गुणों को रेखांकित किया, जो किसी भी संस्थापक में होना चाहिए। इन गुणों में अन्य चीजों के साथ ही साथ विश्वसनीयता, प्रतिबद्धता और लचीलापन भी शामिल हैं। मोहित गुप्ता इन सभी पर खरे उतरते हैं।”

आपको बता दें मोहित गुप्ता को यह सह-संस्थापक का रोल काफी कम समय में मिला है। वह 2018 में कंपनी में शामिल हुए, जिससे पहले वह MakeMyTrip में बतौर COO अपनी भूमिका निभा रहे थे। इस बीच गोयल ने आगे कहा,

“मोहित गुप्ता के पास उच्च स्तर का स्वामित्व प्रबंधन कौशल है, यहाँ तक कि उन्होंने पिछले दो वर्षों में दो बार 100% वेतन में कटौती की है ताकि कंपनी को कुछ मुश्किल दौरों से उबारा जा सके।”

आपको बता दें गोयल के साथ Zomato की सह-स्थापना करने वाले पंकज चड्ढा ने अपने एक दशक के लंबे कार्यकाल के बाद कंपनी को छोड़ने का फैसला किया था। उन्होंने Mindhouse नामक एक और स्टार्टअप स्थापित किया है।