कल यानि 13 मई को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की पहली किश्त का ऐलान किया। इसमें सबसे खास रहा छोटे व्यवसायों को लोन गारंटी की पेशकश।

दरसल किये गये ऐलान के मुताबिक 5.94 लाख करोड़ रुपये का पैकेज COVID-19 संकट की चपेट में आने वाले उद्योग जगत के लिए लोन और लिक्विडिटी की सुनिश्चिता करता है।

इस पैकेज के तहत नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) को 30,000 करोड़ रुपये की विशेष लिक्विडिटी राशि प्रदान की गयी है, और साथ ही बाजार में लोन सुविधा को फ़िलहाल सरल बनानें के लिए 45,000 करोड़ रुपये की आंशिक क्रेडिट गारंटी योजना भी इसमें शामिल की गयी है।

पर इसका सबसे दिलचस्प पहलु रहा कि इस पैकेज में छोटे व्यवसायों के लिए सरकारी गारंटी के तौर पर 3 लाख करोड़ रुपये के Collateral-Free (बिना किसी गारंटी वाले) लोन का ऐलान किया गया। इसमें सबसे अधिक तनावग्रस्त क्षेत्रों को 20,000 करोड़ रुपये का डेबिट फंड और इक्विटी सपोर्ट प्रदान करने के लिए 50,000 करोड़ रुपये का फंड भी शामिल है।

इसके साथ ही साथ वित्त मंत्री ने MSMEs की परिभाषा में भी कुछ अहम बदलावों की घोषणा की। जैसे कि MSMEs में निवेश की सीमा को बढ़ा दिया गया है और मानदंड के रूप में टर्नओवर को लेकर नयी सीमाएं जोड़ी गई हैं। उम्मीद यह की जा रही है कि इस तरह से MSMEs को खुद को मिलने वाले प्रोत्साहन को खोये बिना आकार में बढ़ने की अनुमति मिल सकेगी।

साथ ही साथ जैसा की प्रधानमंत्री ने भी अपने भाषण में स्वदेशी चीज़ों को बढ़ावा देने पर जोर दिया था, वह इस पैकेज में भी साफ़ नजर आया है। दरसल स्थानीय उत्पादों की सोर्सिंग को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी टेंडरों में 200 करोड़ रुपये तक के सभी सरकारी टेंडर केवल स्थानीय स्तर से ही मंगाएं जायेंगें।

इस बीच आपको बता दें वित्तमंत्री के अनुसार 3 लाख करोड़ रुपये की सरकारी लोन गारंटी योजना 31 अक्टूबर तक चलती रहेगी, जिसमें करीब 45 लाख कंपनियों को फायदा पहुंचेगा। लेकिन एक अहम सवाल यह उठता है कि क्या स्टार्टअप जगत को इसका लाभ मिल पायेगा?

दरसल इकॉनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट की मानें तो देश में अधिकांश टेक्नोलॉजी आधारित स्टार्टअप्स को शायद सरकार के इस Collateral-Free लोन वाले 3 लाख करोड़ रूपये के बड़े ऐलान का लाभ शायद न मिल पाएं।

ऐलान के मुताबिक व्यवसाय 29 फरवरी तक बैंकों और गैर-बैंकों से उनके बकाया लोन का 20% तक क्रेडिट (लोन) फिर से ले सकतें हैं। लेकिन इसमें सिर्फ वहीँ कंपनियां ऐसा कर पायेंगी जिनके बकाया लोन की राशि 25 करोड़ रूपये या उससे अधिक होगी और उनकी कंपनी का टर्नओवर 100 करोड़ रूपये तक हो।

विशेषज्ञों की मानें तो अधिकतर स्टार्टअप्स को लोन हासिल करने में काफी दिक्कतें आती हैं, क्योंकि राज्यों के स्वामित्व वाले वित्तीय संस्थान भारी संपत्ति गिरवी रख सकनें और लाभदायक उद्यमों को ही लोन जारी करने में प्राथमिकता देतें हैं, इसलिए अधिकांश स्टार्टअप्स लोन के बजाये बड़ी राशि के लिए इक्विटी के सहारें वोर्किंग कैपिटल का जुगाड़ करते रहतें हैं। और ऐसे में इन नए नियमों के साथ स्टार्टअप्स के लिए लोन हासिल करना और भी मुश्किल हो सकता है।

इसके साथ ही साथ ऐसी चिंताएँ भी व्यक्त की जा रहीं है कि नयी MSMEs की परिभाषा के तहत, भारतीय स्टार्टअप्स का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आत्मनिर्भर भारत अभियान योजना का लाभ उठाने से चूक जाएगा।

इसका भी एक कारण है दरसल MSMEs की परिभाषा में शामिल नयी टर्नओवर लिमिट के चलते रिपोर्ट्स के मुताबिक कई विशेषज्ञों का मानना है कि ये स्टार्टअप खुद को प्रस्तावित लोन लाभ के लिए इस टर्नओवर के पैमानें पर खरा साबित नहीं कर पायेंगें। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि बहुत से स्टार्टअप टेक्नोलॉजी जगत में ही व्यवसाय कर रहें हैं।

लेकिन इतना जरुर है कि मैन्युफैक्चरिंग और सहायक सेवा क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप्स अब MSMEs की इस नयी परिभाषा में खुद को फिट कर पाएं। लेकिन ऐसा जरुर है कि अब निवेशकों ने भी अब वित्त मंत्री के नए ऐलान के बाद कंपनियों को पोर्टफोलियो को MSMEs के पैमानें पर परखना शुरू कर दिया है।

इस बीच स्टार्टअप जगत को उम्मीद यही है कि आगामी कुछ दिनों में प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रूपये के राहत पैकेज में से सीधे स्टार्टअप जगत के लिए भी कुछ आंशिक पैकेजों की घोषणा हो सकती है।