बेशक इंटरनेट लोगों की जिंदगियों में कई बड़े और अच्छे बदलाव ला रहा है, लेकिन इंटरनेट की दुनिया में सब कुछ अच्छा ही है, ऐसा कहना गलत होगा।

इसका एक उदारहण भी एक बार फिर से देखनें को मिला, जब रविवार को Twitter, Instagram जैसे तमाम प्लेटफार्म पर कुछ बहुत ही विचलित कर देने वाले स्क्रीनशॉट की एक सीरीज वायरल होने लगी, जो थी ‘Bois Locker Room’ नाम से बने एक Instagram चैट ग्रुप की। हैरान और परेशान करने वाली बात तो यह कि इस ग्रुप के तमाम सदस्यों में से अधिकतर दिल्ली के 15-16 साल की उम्र वाले लड़के थे, जो कथित तौर पर कम उम्र की लड़कियों की तस्वीरों को एडिट कर अश्लील बनाकर वायरल कर रहे थे।

जैसा कि होना ही था, एक बार इन चैटों का स्क्रीनशॉट सामने आते ही यह Twitter, Instagram, Facebook जैसे सभी प्लेटफार्मों पर भयंकर वायरल हो गया। और अधितकर लोग इस ग्रुप और इसमें शामिल लड़कों के खिलाफ कड़ी कार्यवाई की मांग करते नजर आयें।

और अब इस दिशा में ऐसा ही एक सख्त कदम उठाते हुए दिल्ली महिला आयोग ने अब Instagram और दिल्ली पुलिस को एक नोटिस जारी किया है, जिसमें ‘मामले का संज्ञान’ लेते हुए, इसके गंभीर अपराध की श्रेणी में आने पर प्रकाश डाला गया और इन अपराधियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की माँग भी की गयी।

इतना ही नहीं बल्कि इस नोटिस में ग्रुप के प्रत्येक सदस्य और ‘Bois Locker Room’ के एडमिन के असल नाम, उनकें हैंडल, ईमेल आईडी, पासवर्ड, स्थान, आईपी एड्रेस आदि के विवरण भी मांगे गए हैं। साथ ही साथ नोटिस ने दोनों पक्षों (Instagram और दिल्ली पुलिस) से पूछा भी गया कि क्या उन्होनें मामलें का का संज्ञान लिया? क्या कोई गिरफ्तारी या कार्रवाई की? और अगर नहीं किया तो ऐसा न करने का क्या कारण है?

हमनें भी Instagram को कई सवालों की एक श्रृंखला के साथ कांटेक्ट किया है और इसके बारे में अपडेट मिलते ही हम आपको पूरे मामले से अवगत करवायेंगें।

लेकिन इस बीच बता दें दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने 4 मई को आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था और उससे पूछताछ भी शुरू कर दी थी। साथ ही जैसा कि स्वाभाविक था अब ग्रुप चैट को हटा दिया गया है।

लेकिन यह ग्रुप पिछले कुछ महीनों से काफी सक्रीय था और हाल ही में मामले की गंभीरता का एहसास होते ही ग्रुप के ही किसी सदस्य ने स्क्रीनशॉट और एनी डिटेल्स साझा किये।

इस बीच इन सभी के जरिये मिली लड़कियों की निजी तस्वीरें, भद्दे कमेंट, अपनी महिला सहपाठियों/दोस्तों के ‘गैंगरेप की योजना बनाना’, उनसें यौन संबंध बनानें जैसी बातें, आदि सभी सबूतों काफी है कि इस मामले को उत्पीड़न के इरादे से निजी डेटा और गोपनीयता के उल्लंघन की श्रेणी में रखा जा सके।

दरसल तकनीक और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के आगमन के साथ ऐसे उपयोगकर्ता के ट्रेस हासिल तो किये जा सकतें हैं और मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस मामले में किये भी जा चुकें हैं। लेकिन अब देखना यह है कि ग्रुप के सदस्यों की पहचान होने के बाद अब पुलिस गिरफ्तारी और पूछताछ में कितना वक़्त लगाती है?

न जाने ‘रेप’ आदि जैसी घिनौनी चीज़ों को बढ़ावा देने वाले ऐसे कितने लॉकर रूम अभी भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म में चल रहें हैं? और ऐसे में एक सवाल Instagram पर भी उठता है कि कैसे ग्रुप में कम उम्र के लड़कों ऐसी अश्लील एडिट तस्वीरों को फैलाया जाता रहा और प्लेटफार्म में अब तक रेड-फ्लैग तक नहीं किया गया?

साफ है यह निंदनीय घटना एक सबक होना चाहिए सिर्फ लोगों के लिए ही नहीं बल्कि ऐसे प्लेटफार्म के लिए ताकि आगे से ऐसे उपयोगकर्ताओं पर लगाम लगाया जा सके और ऐसे घिनौने अपराध करने वाले अकाउंट्स को तुरंत चिन्हित कर उनके खिलाफ तुरंत कड़ी कार्यवाई की जा सके।