WhatsApp Payment सुविधा को भारत में लॉन्च करने के लिए कंपनी काफी लम्बें समय से संघर्ष कर रही है। लेकिन अब WhatsApp Payment इस सुविधा को लेकर इकॉनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के हवाले से एक अहम जानकारी सामने आई है।

दरसल इस रिपोर्ट के मुताबिक Facebook के मालिकाना हक वाले WhatsApp ने अब नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) को यह बताया है कि कंपनी मई तक सभी स्थानीय बैंकिंग नियामक द्वारा अनिवार्य नियमों के पालन के लिए पूरी तरह से तैयार होगी।

जैसा कि हमनें आपको बताया भारत की डेटा स्टोरेज नीति और अपनी मूल कंपनी के साथ डेटा शेयरिंग के नियमों अदि को लेकर WhatsApp Pay को बीते 2 सालों से सरकारी मंजूरी नहीं मिल सकी है।

इतना ही नहीं बल्कि फरवरी में WhatsApp Pay को पायलट प्रोजेक्ट में उपयोगकर्ताओं की संख्या को 1 मिलियन से बढ़ाकर 10 मिलियन करने संबंधी योजना भी अमल में नहीं लायी जा सकी थी।

इस बीच इस रिपोर्ट में मामलों के जानकार अधिकारी के हवाले से कहा गया;

“WhatsApp को भले आंशिक रोलआउट के लिए अनुमति देने का ऐलान कर दिया गया हो, लेकिन अभी पूरी तरह से इसको मंजूरी नहीं मिली है। NPCI भी इस दिशा में सुरक्षित रूप से आगे बढ़ रहा है क्योंकि यह मामला अभी भी कोर्ट में है और NPCI कंपनी द्वारा सभी मानदंडों को पूरा करने और कोर्ट के फैसले के बाद ही WhatsApp की इस सुविधा को मंजूरी देने के पक्ष में है।”

वहीँ इस संबंध में WhatsApp की ओर से कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा;

“हम लगातार सरकार के साथ काम कर रहें हैं ताकि हम अपने करीब 400 मिलियन भारतीय उपयोगकर्ताओं को WhatsApp Pay सुविधा का लाभ उठाने का अवसर दे सकें।”

“WhatsApp की यह सुविधा डिजिटल भुगतान प्रक्रिया को तेज करने में मदद करेगी, जो COVID-19 के मौजूदा हालातों के बीच एक अहम कदम साबित हो सकता है क्योंकि यह लेनदेन करने के लिए एक सुरक्षित तरीका भी है।”

आपको बताना चाहेंगें कि नवंबर में भारतीय रिज़र्व बैंक ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने NPCI को निर्देश दिया था कि WhatsApp Pay को रोल आउट न होने दिया जाए क्योंकि कंपनी ‘डेटा स्थानीयकरण’ नियमों का पालन नहीं कर रही थी, जो किसी भी बैंकिंग नियामक ने भुगतान फर्म के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त है।

बतौर थिंक टैंक काम करने वाले Centre for Accountability and Systemic Change (CASC) ने भी फरवरी में सुप्रीम कोर्ट में एक अपील की थी, जिसमें इसने WhatsApp Pay के लिए UPI- आधारित भुगतान सेवा के पायलट और इसको 10 मिलियन उपयोगकर्ताओं तक बढ़ाने पर को रोक लगाने की माँग की थी। कारण यह दिया गया था कि WhatsApp फ़िलहाल RBI के मानदंडों को पूरा नहीं कर रही है।

CASC के वकील विराग गुप्ता के अनुसार संस्था ने अपनी दलील में यह भी कहा था कि;

“WhatsApp मौजूदा समय में RBI के डेटा स्थानीयकरण नियमों का पालन किये बिना अपनी WhatsApp Payment सेवा की बीटा टेस्टिंग जारी रखे हुए है और यहाँ तक की इसको अपने एनी उपयोगकर्ताओं के लिए भी मुहैया करवा रही है, जबकि RBI द्वारा डाली गयी अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।”

लेकिन अब WhatsApp का NPCI को मई तक सभी नियमों के पालन के लिए पूर्णतः तैयार हो जाने के ऐलान के बाद अब देश में WhatsApp Pay की शुरुआत का रास्ता साफ़ होता नज़र आ रहा है।