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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज 50,000 करोड़ रुपये के Targeted Long-Term Repo Operations (TLTRO) की घोषणा कर गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (NBFCs) और छोटे-वित्त संस्थानों (MFIs) को राहत देने की कोशिश की है।

माना ये जा रहा है कि इस कदम से मुख्यतः छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों (MSMEs) को एक बड़ी मदद मिल सकेगी।

दरसल केंद्रीय बैंक ने कहा कि TLTRO 2.0 के तहत बैंकों द्वारा लिए गए फंड को निवेश-ग्रेड बॉन्ड, कमर्शियल पेपर और गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर NBFCs में निवेश किया जा सकेगा, जिसमें कम से कम 50 प्रतिशत राशि छोटी और मध्यम NBFCs और MFIs के पास होती है।

इस बात में कोई शक नहीं कि NBFC और MFIs असल मायनों में छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों (MSMEs) को लों देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। और COVID-19 के चलते पैदा हुए लॉकडाउन जैसे हालातों में MSMEs को जो एक बड़ा झटका लगा है, अब यह कदम उन्हें थोड़ी राहत जरुर दे सकता है, क्यूंकि अब NBFC और MFIs इन छोटे व्यवसायों को अधिक संख्या में लोन देने में सक्षम हो गये हैं।

दरसल MoneyControl की एक रिपोर्ट के हवाले से KPMG India के डील एडवाइजरी-फाइनेंशियल सर्विसेज के पार्टनर संजय दोशी ने RBI के इस के बाद कहा;

“मौजूदा हालातों का बिजनेस स्तर पर वर्किंग कैपिटल में सीधा असर होने का अनुमान लगाया जा रहा है, इसलिए डेट सर्विसिंग और री-पेमेंट के लिए कैश फ्लो की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती साबित होगी।”

दरसल RBI के इस नए कदम के बाद अब SMEs को मौजूदा आर्थिक संकट की स्थिति में वर्किंग कैपिटल के संदर्भ में थोड़ी राहत जरुर मिलेगी।

दरसल RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने एक वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संपत्ति वर्गीकरण मानदंडों में छूट की घोषणा की। इसके तहत इस सुविधा का लाभ उठाने वाले खातों को RBI के 90-दिवसीय NPA वर्गीकरण मानदंडों से बाहर रखा जाएगा। शक्तिकांत दास के अनुसार;

“1 मार्च से 31 मई 2020 तक ऐसे सभी खातों के लिए संपत्ति वर्गीकरण एक जैसा ही रहेगा। साथ ही यह दिशानिर्देश NBFCs पर भी लागू होंगे।”

आपको बता दें RBI ने 27 मार्च को बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को निर्देश देते हुए उधारकर्ताओं से एक मार्च से अगले तीन महीनों तक के लिए लोन की री-पेमेंट की अनिवार्यता समाप्त करने को कहा था।

इस कदम को MSMEs के लिए राहत का कदम इसलिए भी कहा जा रहा है क्यूंकि अधिकांश SMEs के लिए आमतौर पर 90 से 120 दिनों की एक छोटी वर्किंग कैपिटल साईकल होती है। और ऐसे में RBI के नए दिशानिर्देशों से इन्हें थोड़ी राहत जरुर मिलेगी।