देश के वाणिज्य मंत्रालय ने बुधवार कुछ आँकड़े जारी करते हुए इस बात की जानकारी दी कि वित्तवर्ष 2019-20 में भारत का फोन निर्यात 3.6 करोड़ यूनिट हो गया। खास यह है कि यह पिछले साल के 1.7 करोड़ यूनिट के आँकड़े से दोगुनी बढ़त है।

अगर मूल्यांकन संबंधी बात करें तो 31 मार्च को समाप्त हुए पिछले वित्तवर्ष तक निर्यात में सालाना रूप से 91% की वृद्धि दर्ज की गयी। आपको बता दें भारत ने बीते वित्तवर्ष में 21,000 करोड़ रुपये के डिवाइसों का निर्यात किया।

साथ ही पिछले वित्त वर्ष में इस श्रेणी में आयात 20 लाख से बढ़कर 2.6 करोड़ हो गया और 81% की वृद्धि दर्ज की गयी।

वहीँ इकॉनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट में TechArc के संस्थापक और मुख्य विश्लेषक फैसल कावोसा ने कहा,

“भारत ने बेहतर रियायतों और पॉलिसी के चलते मोबाइल फोन सेगमेंट में कई वैश्विक दिग्गज कंपनियों जैसे Samsung और चीन की OEMs को आकर्षित किया है।”

“बड़े पैमाने पर काफी समय से कमजोर नज़र आने वाले घरेलू बाजार ने इन खिलाड़ियों को स्थानीय मांग के साथ-साथ यहाँ अपना आधार स्थापित करने का भी अवसर दिया है।”

आपको बता दें ऊपर पेश किया डेटा असल में ‘Telephones For Cellular या For Other Wireless Networks’ श्रेणी का है, जिसमें फीचर फोन, स्मार्टफोन और फोन असेंबली पार्ट्स के साथ-साथ अन्य चीज़ें जैसे चार्जर आदि भी शामिल हैं। वहीँ विशेषज्ञों से अनुसार अन आंकड़ों का लगभग 90% तैयार डिवाइसों को दर्शाता है।

दरसल भारत में स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने में Apple, Xiaomi, Oppo, Vivo, OnePlus, Realme और Samsung जैसे प्रमुख ब्रांड्स का बड़ा योगदान है। इन्होनें भारत में अपने स्थानीय उत्पादन को शुरू कर या बढ़ाकर इस वृद्धि को और तेज किया है, और जिसके चलते अब दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्मार्टफोन बाज़ार ने निर्यात में भी तेजी देखी है।

दरसल सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ मुहीम व Merchandise Export Incentive Scheme (MEIS) का भी इस वृद्धि में अहम योगदान रहा है।

आपको बता दें MEIS के तहत सरकार निर्यात किए जाने वाले उत्पाद और देश के आधार पर 4% तक का ड्यूटी लाभ प्रदान करती है। इस योजना के तहत रिवार्ड्स के रूप में मुफ्त-ऑन-बोर्ड प्रतिशत, MEIS ड्यूटी क्रेडिट आदि शामिल हैं, जिसका उपयोग कंपनी के लिए सीमा शुल्क जैसे विभिन्न भुगतानों में किया जा सकता है।

इस बीच सरकार ने दिलचस्प रूप से देश में नए उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए इस प्रोत्साहन छूट को इस साल एक अगस्त से 4% से 6% तक बढ़ाने का भी मन बनाया है।

असल में सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में फ़िलहाल हैंडसेट और इसके कंपोनेंट बनाने वाली लगभग 270 फैक्ट्रियां हैं।

वैश्विक स्मार्टफोन बाजार में भारत का योगदान 2016 में रहे 9% से बढ़कर 2019 में 16% तक का हो गया है।

गौर करने वाली बात यह भी है कि चीन दुनिया की फोन फैक्ट्री के रूप में अपनी चमक तेजी से खो रहा है, जिसके कई कारण हैं। हाल ही में अमेरिका से चल रहा व्यापार संबंधी तनाव भी इसकी मुख्य वजहों में से एक है। ऐसे में भारत के पास दुनिया के लिए चीन से बेहतर विकल्प बनकर उभरने का सुनहरा अवसर है।