बीती फ़रवरी में भारत के भीतर UPI (Unified Payments Interface)) ने करीब 1.33 बिलियन लेनदेन का एक अकल्पनीय आँकड़ा पार किया था।

लेकिन उसके बाद से देश में सबसे अधिक UPI पेमेंट का समर्थन करने वाले YES Bank के धराशाई होने और उसके बाद देश भर में कोरोना वायरस के फैले प्रकोप को देखते हुए शायद ही किसी ने यह सोचा भी हो कि एक बार फिर से देश में UPI आधरित लेनदेन संबंधी आँकड़ा बिलियन पार हो पायेगा?

लेकिन आपको बता दें ऐसा हुआ है, जी हाँ! एक बार फिर से देश में UPI आधारित लेनदेन ने बिलियन का आंकड़ा पार कर लिया है, और जिससे यह साफ़ हो गया है कि न ही YES Bank की ख़राब हालत और न ही कोरोना वायरस का प्रकोप, UPI आधारित लेनदेन को अपेक्षित रूप से प्रभावित कर सका है।

हालाँकि इतना जरुर है कि 1.25 बिलियन लेनदेन के साथ आँकड़ों में तुलनात्मक रूप से मामूली गिरावट दर्ज की गयी, लेकिन इसके बाद भी आँकड़े हैरान करने वाले ही थे। यह पिछले महीनें की तुलना में 6% गिरावट के साथ रहें, लेकिन इस दौरान के हालातों को देखते हुए इसको इतनी प्रमुखता नहीं दी जा सकती है।

साथ ही अगर बात करें इस UPI आधारित लेनदेन में कुल राशि की तो यह आँकड़ा मार्च में 2,06,462 करोड़ रूपये या 2.06 ट्रिलियन रूपये ($26 बिलियन) रहा। आपको याद दिला दें फरवरी में यही आँकड़ा 2,22,517 करोड़ रुपये या 2.22 ट्रिलियन रुपये था।

लेकिन यह वक़्त इतना खुश होने का भी नहीं। दरसल विशेषज्ञों का अनुमान है कि अप्रैल में यह दोनों आँकड़े काफ़ी गिरावट दर्ज कर सकतें हैं। और इसके पीछे एक मुख्य कारण होगा UPI लेनदेन पर 1 अप्रैल 2020 से लागू होने जा रहा शुल्क।

जी हाँ! जैसा कि हम आपको पहले भी बता चुकें हैं, भारत के कुछ सबसे बड़े निजी बैंकों द्वारा 1 अप्रैल से UPI आधारित लेनदेन के लिए शुल्क निर्धारित किये गये हैं। उदाहरण के लिए Kotak Bank की बात की जाए तो पहले 20 मुफ्त पीयर टू पीयर लेनदेन के बाद आपको प्रति UPI लेनदेन के लिए 5 रूपये का शुल्क देना होगा।

लेकिन एक बार फिर से हम स्पष्ट कर दें कि यह शुल्क सिर्फ पीयर टू पीयर लेनदेन पर लागू होगा, न कि व्यापारी UPI लेनदेन पर।

लेकिन यह शुल्क ही इस संभावित गिरावट का एकमात्र कारण नहीं रहेगा, दरसल देश में चल रहे लॉकडाउन (जिसमें अप्रैल के शुरू के 2 हफ्ते भी शामिल हैं) के चलते भी UPI लेनदेनों में कमी आएगी, क्यूंकि स्वाभाविक रूप से बाज़ार बंद हैं, और सभी लोग सिर्फ और सिर्फ बुनियादी जरूरतों का सामान ही खरीद रहें हैं।