टेक कंपनियों के इतिहास में शायद सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी अधिग्रहण साबित हो सकने वाली खबर बनते बनते रह गयी।

जी हाँ! ऐसा हम इसलिए कह रहें हैं क्यूंकि Xerox ने HP के प्रतिद्वंदी अधिग्रहण के तहत लगायी गयी $35 बिलियन की बोली को वापस ले लिया है।

दरसल कहा यह जा रहा है कि मौजूदा हालातों में कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते चरमराई अर्थव्यवस्था और कंपनियों की हालत के वजह से Xerox ने भी एतिहाती तौर पर अधिग्रहण जैसे मुद्दे पर अपना ध्यान नहीं लगाना चाहता है।

ऐसा माना जा रहा है कि इस डील में मैनेजमेंट के दोनों छोर से कुछ निवेशकों और कई वरिष्ठ अधिकारीयों के लिए बहुत कुछ दांव पर था। औरशायद इसलिए काफी नफ़े-नुकसान का अंदाज़ा लगते हुए यह फैसला किया गया।

हालाँकि HP के सीईओ Enrique Lore के लिए यह एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा सकता है। दरसल पिछले साल नवंबर में कैलिफोर्निया स्थित कंपनी Palo Alto की बागडोर संभालते ही Lore को इस अधिग्रहण के प्रयास का सामना करना पड़ा था।

लेकिन वहीँ दूसरी और यह Xerox के सीईओ और पूर्व HP के अधिकारिक रह चुकें John Visentin के लिए उतनी ही बड़ी हार साबित हुई, क्योंकि John ने इस डील को सफल बनाने के लिए अपनी ओर से पूरा दमख़म लगा दिया था।

वहीँ बात करें अरबपति निवेशक और दोनों कंपनियों में एक बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले Carl Icahn की तो उनके लिए यह और भी बड़ी विफलता साबित हुई, क्यूंकि वह काफी समय से इस अधिग्रहण को लेकर जोर दे रहे थे।

दिलचस्प यह है कि इस फैसले का ऐलान तब किया गया जब करीब महीने भर पहले ही Xerox ने HP के शेयरधारकों के साथ कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते बैठक को स्थगित किया था।

इस बीच इस फैसले को लेकर जारी एक बयान के अनुसार Xerox ने कहा;

“यह कदम उठाना बेहद निराशाजनक रहा लेकिन फ़िलहाल हम अपने कर्मचारियों, ग्राहकों, भागीदारों और अन्य लोगों की स्वास्थ्य, सुरक्षा और भलाई को प्राथमिकता दे रहे हैं, फैली इस महामारी से निपटने की दिशा में प्रयास कर रहें हैं, जो अपनी अन्य सभी चीज़ों से ज्यादा अहम है।”

साथ ही अपने बयान में आगे इस प्रिंटर निर्माता कंपनी ने यह भी कहा कि Xerox और HP के साथ आने से दोनों को लंबे समय तक वित्तीय और रणनीतिक लाभों का फायदा मिलता। लेकिन HP के बोर्ड के इनकार और कई महीनों तक निरंतर देरी के चलते उन HP शेयरधारकों के लिए यह असंतोष की स्थिति पनपी, जिन्होंने इस डील को लेकर जबरदस्त समर्थन दिया था।

वहीँ HP ने जारी किये अपने एक बयान में कहा,

“HP अपने शेयरधारकों, भागीदारों, ग्राहकों और कर्मचारियों को उनके इनपुट देने और लगातार अपना समर्थन जारी रखने के लिए धन्यवाद देना चाहता है।”

असल में कोरोना वायरस की फैली महामारी का HP और Xerox दोनों के शेयर की कीमतों पर काफी बड़ा आर्थिक प्रभाव पड़ा है। हालाँकि Xerox की तुलना में HP अपने विविध व्यवसाय के कारण थोड़ा मजबूत जरुर साबित हुआ है। दरसल जहाँ Xerox का राजस्व मुख्यतः प्रिटिंग बिज़नस पर भी निर्भर करता है, वहीँ HP का प्रिंटिंग बिज़नस प्रभावित होने के बाद भी इसके PC बिज़नस ने तुलनात्मक रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है।

लेकिन ऐसा लगता है कि इस अधिग्रहण की कहानी इतने में ही रुकने वाली नहीं है। जहाँ Xerox शायद अभी भी लगातार बेहतर से बेहतर डील की पेशकश कर HP को रिझाने की कोशिश करता रहेगा, वहीँ HP शायद पहले के तमाम फैसलों की तरह ही इन डीलों को भी ठुकराता रहे।

आपको बता दें Xerox द्वारा इस नयी $35 बिलियन की बोली से पहले फरवरी में कंपनी ने $24 बिलियन की बोली लगायी थी।