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कुछ दिनों पहले ही भारत में टेलीकॉम कंपनियों ने देश में मौजूद स्ट्रीमिंग प्लेटफार्मों से अपनी स्ट्रीमिंग क्वालिटी को घटाने की अपील की थी। टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि COVID-19 के चलते देश में अधिकतर लोग घरों में ही हैं और इसलिए इंटरनेट बैंडविथ के अधिक इस्तेमाल के चलते बोझ बढ़ा है।

और अब इस अपील को गंभीरता से लेते हुए Netflix ने मंगलवार को यह ऐलान किया कि वह इंटरनेट ट्रैफिक को कम करने के लिए यूरोप की ही तरह भारत में भी 30 दिनों की अवधि के लिए नेटवर्क प्रदाताओं पर पड़ने वाले अपने ट्रैफ़िक को 25% तक कम करेगा।

इस अमेरिकी कंपनी ने कहा कि इंटरनेट सेवा प्रदाताओं पर दबाव कम करने के बावजूद, यह अपनी कंटेंट क्वालिटी को बनाए रखेगा।

वहीँ कंपनी के प्रतिद्वंदी Amazon Prime Video के अनुसार उनसे भी डेटा खपत को भी कम करने के लिए अपने स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म को कस्टमाइज किया है। साथ ही Disney के मालिकाना हक वाले Hotstar, Times Internet के MX Player और Zee5 सहित स्थानीय प्लेटफार्मों ने ही अब इस दिशा में कदम उठाने की शुरुआत कर दी है।

इस बीच TechCrunch में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, Netflix के VP Content Delivery, Ken Florance ने कहा;

“इस संकट की स्थिति को देखते हुए हमनें अपनी स्ट्रीमिंग की क्वालिटी को बनाए रखते हुए दूरसंचार नेटवर्क पर Netflix के ट्रैफ़िक को 25% तक कम करने का एक तरीका विकसित किया है। इसलिए उपभोक्ताओं अब भी अपने पैकेज के अनुसार Ultra-High, High या Standard Definition की क्वालिटी का लुफ्त उठाना जारी रखेंगें।”

“हम ऐसा लगता है कि यह कदम टेलीकॉम नेटवर्कों को एक बेहद जरूरी राहत प्रदान करेगा और अगले 30 दिनों के लिए इसे भारत में जारी रखा जायेगा।”

इस बीच ऐसी अटकलें लगायी जा रहीं हैं कि Netflix India असल में अपनी उच्चतम बैंडविड्थ स्ट्रीम को हटा रहा है। हालाँकि इससे भारत के अधिकांश Netflix उपयोगकर्ताओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

दरसल Netflix द्वारा पिछले साल भारत में पेश की जाने वाली Mobile-Only योजना को देश भर में काफ़ी तेजी से पसंद किया गया है। बता दें भले वह कंपनी का Mobile-Only प्लान हो या Basic प्लान यह दोनों ही स्ट्रीमिंग को Standard Definition तक सीमित करते हैं।

इस बीच TechCrunch द्वारा जारी एक रिपोर्ट में Bank of America की रिपोर्ट को आधार बताते हुए कहा गया है कि भारत में इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के बीच दैनिक ट्रैफिक और डेटा खपत की मात्रा में 10% की वृद्धि दर्ज की गयी है।