कोरोना वायरस की महामारी ने जो सबसे बड़ा प्रभाव डाला है, वह यह कि इसके चलते दुनिया भर के देशों में लॉकडाउन की स्थिति हो गयी है।

जी हाँ! इससे दुनिया भर के तमाम लोग घरों में बैठने को मजबूर हैं, जिसमें अब भारत भी शामिल हो चूका है।

लेकिन इससे दुनिया भर में इंटरनेट के बुनियादी ढांचे पर एक बड़ा बोझ पड़ा है, क्योंकि लोग अब स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन लेक्चर, घर से काम करने आदि के लिए पहले से कहीं अधिक ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं।

और इंटरनेट पर पड़ने वाले इसी अतिरिक्त बोझ के चलते भारत में दूरसंचार ऑपरेटरों ने दूरसंचार विभाग और गृह मंत्रालय से आगे आकर ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफार्मों पर ‘स्ट्रीमिंग क्वालिटी’ को घटाने संबंधी दबाव बनाने की अपील की है, ताकि इस तनावपूर्ण स्थिति में इंटरनेट व दूरसंचार के बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाला बोझ थोड़ा कम किया जा सके।

दरसल तरीका काफ़ी सरल है, स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म को सिर्फ अपने उपलब्ध उच्चतम Resolution को कम करने के लिए Standard Definition (SD) पर कटौती करनी होगी। साथ ही टेलीकॉम कंपनियों ने इन प्लेटफार्मों को भारी बैंडविड्थ की खपत वाले विज्ञापनों और पॉप-अप को भी हटाते हुए नेटवर्क लोड को कम करने के लिए कहा है।

दरसल यह एक सच है कि Netflix, Amazon Prime Video, Youtube और Hotstar जैसे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म भारतीयों के बीच एक व्यापक आधार बनाने में कामयाब रहे हैं। और भारत के दुनिया भर में सबसे सस्ती डेटा दरों वाले देशों में से एक होने के चलते भी यह संख्या काफी तेजी से बढ़ी है।

आपको बता दें इन स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म पर अधिकांश उपलब्ध डेटा स्पीड के अनुसार वीडियो की गुणवत्ता बनाये रखने का काम करते हैं, और संभवतः सबसे अच्छा Resolution प्रदान करने की कोशिश करते हैं।

लेकिन मौजूदा समय में इंटरनेट ट्रैफिक में लगातार वृद्धि के कारण अचानक बड़ी संख्या में लोगों द्वारा HD कंटेंट की स्ट्रीमिंग इन दूरसंचार कंपनियों की नेटवर्क इकाइयों पर अत्यधिक बोझ का कारण बन रही है।

इसलिए टेलीकॉम कंपनियों का यह कदम इतना सुनिश्चित कर सकता है कि दूरसंचार ऑपरेटर नए हालातों में भी उपयोगकर्ताओं को उपयुक्त सेवाएं प्रदान करना जारी रख सकें।

वहीँ Netflix ने पहले ही यह सुनिश्चित करने की बात कही कि कंपनी विडियो क्वालिटी से समझौता किए बिना कम इंटरनेट बैंडविड्थ का उपयोग करने के तरीकों पर काम कर रही है।

बता दें दुनिया के अन्य हिस्सों में Netflix, Amazon, YouTube जैसी कंपनियों ने मौजूदा समय का मुकाबला करने के लिए इस समस्या से निपटने के उपायों को अपनाने की शुरुआत की है। यूरोप में Netflix और Prime Video ने पहले ही नेटवर्क प्रदाताओं की मांगों को मानते हुए, स्ट्रीमिंग क्वालिटी को कम कर दिया है, वहीँ YouTube ने डिफ़ॉल्ट वीडियो क्वालिटी को वापस SD पर स्केल करने का फैसला किया है, जो उपयोगकर्ता के लिए वैकल्पिक है।