देश और दुनिया में बढ़ते कोरोनो वायरस (COVID-19) मामलों की संख्या को देखते हुए अब अमेरिका में आज पहली बार क्लीनिकल ​​मानव परीक्षण की शुरुआत की गई है।

आपको बता दें यह परीक्षण Seattle के Kaiser Permanente Washington Health Research Institute (KPWHRI) में किया जा रहा है, जिसमें mRNA-1273 के प्रभावों का परीक्षण किया जा रहा है। mRNA-1273 असल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान और एक काफी नई दवा कंपनी, Moderna द्वारा विकसित की गई वैक्सीन है।

आपको बता दें इस परीक्षण में 45 स्वस्थ और युवा लोग शामिल होंगे, जिन्हें वैक्सीन की विभिन्न खुराक दी जाएगी।

इस बीच Moderna का कहना है कि इस वैक्सीन में पारंपरिक मौजूदा वैक्सीनों के बजाए अलग तरीकों का इस्तेमाल किया गया है। दरसल पारंपरिक टीकों में वायरस की थोड़ी मात्रा को ही शरीर में इंजेक्ट किया जाता है।

लेकिन इस नए बनाये गये टीके में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा स्वीकार्य वायरस की तरह ही लगने वाली चीज़ का छोटी मात्रा का उत्पादन करने के लिए दिलचस्प तकनीक का इतेमाल होता है।

एक आम आदमी की भाषा में कहें तो इस सिंथेटिक RNA को एक व्यक्ति में इंजेक्ट करके उसकी कोशिकाओं को एक तरह के प्रोटीन का उत्पादन करने के लिए उकसाया जाता है, जो वायरस की सतह की तरह ही लगता है। जिससे ये वायरस की तरह लगने वाला एलिमेन्ट बिना बीमारी पैदा किए एंटीबॉडी का उत्पादन करने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को ट्रिगर करता है।

लेकिन अभी फ़िलहाल इस वैक्सीन का प्रारंभिक परीक्षण यह देखने के लिए किया जा रहा है कि कहीं इससे इंसान के शरीर में कोई अवांछित दुष्प्रभावों तो नहीं पड़ते हैं? लेकिन आपको बता दें अगर यह परीक्षण सफ़ल भी हो जाता है, तो कई प्रमुख शोधकर्ताओं के अनुसार एक  प्रभावी कोरोनो वायरस वैक्सीन को तैयार करने में भी अभी कम से कम एक से दो साल का वक़्त लग सकता है।

लेकिन Moderna और NIH ही अकेले COVID-19 वैक्सीन विकसित करने की दिशा में कोशिश करने वालों में नहीं हैं। इसमें Inovio Pharmaceuticals भी शुमार है, जो अगले महीने Missouri की Kansas City में स्थित एक टेस्टिंग सेंटर और University of Pennsylvania में अपना परीक्षण शुरू कर सकती है।

इसके साथ ही Regeneron Pharmaceuticals और फार्मा प्रमुख Sanofi ने भी अमेरिका में COVID-19 रोगियों पर Kevzara (sarilumab) का ​परीक्षण शुरू किया है, जो गंभीर बीमारी के चलते अस्पतालों में भर्ती थे। बता दें वैश्विक रूप से पांच देश अब तक COVID-19 वायरस के स्ट्रैंड को अलग करने में सक्षम हो सकें हैं, जो आमतौर पर एक वैक्सीन विकसित करने की दिशा में पहला कदम होता है।

लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रूप से इस वायरस को रोकने के लिए अभी तक कोई कोई सटीक इलाज विकसित नहीं किया जा सका है। हालाँकि भारत सही कुछ देशों में इसके सफ़ल उपचार के भी कुछ मामलें सामने आयें हैं, जहाँ तीन COVID-19 रोगियों को ठीक करने के लिए डॉक्टरों द्वारा HIV और मलेरिया दवाओं के मिश्रण का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया।

लेकिन इतना जरुर है कि यह घातक महामारी दुनिया भर में कहर बरपाती नज़र आ रही है, और जिससे अब तक 6000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

वहीँ COVID-19 के प्रकोप का आर्थिक प्रभाव भी काफी विनाशकारी रहा है, जो वैश्विक बाजारों में अभी भी जारी है। अधिकांश देशों में चल रहे आंशिक और पूर्ण लॉकडाउन के चलते देशों की इकॉनमी को एक बड़ा झटका लगा है।