सरकार मोबाइल फोन के देश में ही निर्माण को बढ़ावा देने और अपनी मेक इन इंडिया योजना के तहत उत्पादन बढ़ाने के लिए 42,000 करोड़ रुपये की मदद जारी करने को लेकर विचार कर रही है।

दरसल इस योजना के जरिये सरकार का उद्देश्य भारत को वैश्विक आपूर्ति चेन के लिए एक बड़े आपूर्तिकर्ता के तौर पर पेश करने का है, क्यूंकि दुनिया का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देश चीन फ़िलहाल कोरोनोवायरस प्रकोप के कारण परिचालन बंद होने के चलते दुनिया भर से माँगों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है।

और अब टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार की इस प्रोडक्शन से जुड़ी संभावित इंसेंटिव स्कीम से हाई एंड मोबाइल निर्माताओं और घरेलू निर्माताओं को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है।

एक ओर जहाँ यह योजना मोबाइल फोन के स्थानीय उत्पादन को बढ़ाने में मदद करेगी वहीँ भारतीय निर्माताओं की चीन पर निर्भरता को भी कम कर सकेगी।

इस रिपोर्ट के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा शुरू की जा रही यह संभावित योजना Apple और Samsung के मँहगे उत्पादों को लेकर भी कंपनियों की दिक्कतें दूर करेगी।

इस बीच टाइम्स ऑफ़ इंडिया की इस रिपोर्ट में MeitY मंत्रालय के सूत्रों द्वारा यह कहा गया कि;

“देश का इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र अन्य देशों के मुकाबलें में कई बुनियादी कमियों से जूझ रहा है, जैसे पर्याप्त बुनियादी ढांचे की कमी, घरेलू आपूर्ति चेन, उच्च लागत; गुणवत्ता शक्ति की अपर्याप्त उपलब्धता; सीमित डिजाइन क्षमताओं, कौशल विकास में अपर्याप्तता और लॉजिस्टिक्स की कमी के कारण इसमें 8.5% से 11% तक खामियों से ग्रस्त है।”

लेकिन अगर सरकार यह वित्तीय मदद मुहैया करवाती है तो इससे देश में Foxconn और Wistron जैसी कंपनियों को काफी लाभ होगा। ये कंपनियां पहले से ही भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निर्माण कार्य कर रही हैं।

लेकिन इसी के सामानांतर दूसरी श्रेणी जो इस योजना से सबसे अधिक लाभान्वित होगी, वह है भारतीय निवासियों के स्वामित्व वाली घरेलू कंपनियों की। जिससे Lava और Micromax जैसी कंपनियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

लेकिन एक सबसे दिलचस्प बात यह है जो इस रिपोर्ट में सामने आई कि इस योजना का लाभ $200 या इससे अधिक की इनवॉयस कीमतों वाले उत्पादों को बनाने वाली कंपनियों को ही मिलेगा। और ऐसे में यह साफ़ हो जाता है कि OPPO और VIVO जैसी कंपनियों को इस योजना का कोई लाभ नहीं मिलेगा, क्यूंकि देश में उनके कोई भी फ़ोन $200 या उससे अधिक की क़ीमत के नहीं है।

बता दें जनवरी में द इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा था,

“MeitY (इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन को लेकर काम कर रहा है और इस प्रोत्साहन का लाभ पाने के लिए कुछ कठिन मापदंड भी तैयार किये जायेंगें।

“हम केवल उन कंपनियों को यह लाभ देना चाहतें हैं जो कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और निर्यात केंद्र बनने में देश की मदद कर सकें।”

दरसल इसी बीच एक सच यह भी है कि तमाम विवादों से जुड़े रहने के कारण दुनिया भर के निर्माता चीन पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहतें हैं, और ऐसे में यह भारत के लिए एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है।