कल सुप्रीम कोर्ट ने बकाया AGR मामले में टेलीकॉम कंपनियों और सरकार के दूरसंचार विभाग को तय किये गये समय के अंदर भुगतान की वसूली न कर पाने को लेकर तल्ख़ फटकार लगाई।

कोर्ट ने कहा की न ही टेलीकॉम कंपनियां और न ही सरकार का दूरसंचार विभाग कोर्ट के आदेश को गंभीरता से ले रहा है। कोर्ट के अनुसार तय की गई समय सीमा में अभी तक टेलीकॉम कंपनियों से एक ही रुपया नहीं वसूला जा सका है।

आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट को शुक्रवार को AGR से जुड़े बकाया को लेकर टेलीकॉम कंपनियों की याचिका पर सुनवाई करनी थी, लेकिन कोर्ट ने इस याचिका को भी रद्द कर दिया।

इतना ही नहीं बल्कि जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कंपनियों को जबजस्त फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि AGR के बकाया का भुगतान न करने और कोर्ट के आदेश को नहीं मानने पर कंपनियों के खिलाड़ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए?

वहीँ दिलचस्प रूप से सुप्रीम कोर्ट की इस फटकार के करीब 6 घंटे बाद ही सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को शुक्रवार रात 11:59 बजे तक बकाया रकम का भुगतान करने के आदेश दिए।

इस आदेश में कहा गया कि Vodafone Idea और Bharti Airtel समेत कोर्ट के आदेश में शामिल अन्य सभी कंपनियों को सरकार द्वारा तय सीमा में बकाया चुकाना होगा।

लेकिन यह ऐलान होते ही Airtel ने कहा कि वह 20 फरवरी तक 10 हजार करोड़ रूपये की रकम चुका सकता है।

लेकिन इन सब के बीच कोर्ट की नाराजगी का एक खास कारण यह भी रहा कि दूरसंचार विभाग के राजस्व मामलों से जुड़े एक डेस्क ऑफिसर ने पिछले दिनों अन्य अफसरों को एक लिखित आदेश दिया कि सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश तक टेलीकॉम कंपनियों पर कोई बकाया न चुकाने पर कोई कार्रवाई न की जाए।

इस पर सुनवाई कर रही बेंच में से जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा

“मुझे लगता है कि इस कोर्ट और इस व्यवस्था में काम नहीं करना चाहिए। एक डेस्क ऑफिसर अकाउंटेंट जनरल को पत्र लिख रहा है। क्या यह पैसे की ताकत का नतीजा यह है कि कोर्ट के आदेश तक की अवहेलना कर दी जाएगी।”

“यह सिर्फ़ कंपनियों पर मेहरबानी का तरीका है।”

हालाँकि इस पर तुरंत ही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से माफी मांगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि डेस्क ऑफिसर ऐसा नहीं कर सकता है और विभाग इसकी जाँच करेगा।

आपको बता दें इस मामले में ताज़ा अपडेट यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने आज टेलीकॉम कंपनियों को वापस से एक नई समय सीमा दी है, जो है 17 मार्च 2020, और इस तारीख तक कोर्ट ने बकाए का पूरा भुगतान करने के आदेश दिया हैं।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों के मैनेजिंग डायरेक्टर्स व शीर्ष अधिकारियों के साथ ही साथ दूरसंचार विभाग को भी आदेश दिया है कि वह सभी इस मामले में 17 मार्च को होने वाली सुनाई में उपस्थित रहें।

इस बीच आपको बता दें एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) यानि दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा टेलीकॉम कंपनियों से ली जाने वाली इस्तेमाल और लाइसेंसिग फीस के तहत तमाम टेलीकॉम कंपनियों को करीब सरकार को 1.47 लाख करोड़ रूपये देने हैं, और कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में 23 जनवरी 2020 तक इस बकाए के भुगतान का आदेश दिया था।

दरसल भारती एयरटेल (Bharati Airtel) पर सरकार का 35,586 करोड़ रूपये ($5 बिलियन) का बकाया है, वहीँ वोडाफोन-आइडिया (Vodafone-Idea) पर 50,000 करोड़ रूपये ($7.2 बिलियन) का बकाया है। वहीँ Reliance के मालिकाना हक़ वाला Jio भी इससे अछूता नहीं है।

इस बीच विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस फैसले से Airtel के फ़िर से उभर सकने की उम्मीद तो है, लेकिन Vodafone इस फैसले की वजह से ढह सकने के कगार पर है।

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