इस बात में कोई शक नहीं की Uber के लिए 2019 की चौथी तिमाही राजस्व के लिहाज़ से काफी उत्साहित करने वाली रही। लेकिन यह जरुर है कि बढ़ते घाटों के चलते कंपनी के लिए लगातार लाभ बढ़ाते रह पाना मुश्किल होने वाला है।

लेकिन दिलचस्प वह आँकड़े भी है, जिसको कंपनी ने अपनी राजस्व रिपोर्ट के बाद पेश किया है। जी हाँ! दरसल Uber ने सेवाओं को लेकर भी सवारी की संख्या इत्यादि के डेटा को सार्वजानिक किया है। दरसल इन आँकड़ो को खास बनाता है Uber का एक दावा, जिसमें कंपनी कहती है कि वह भारत के कैब सर्विस बाज़ार में 50% की हिस्सेदारी के साथ सबसे अग्रणी कंपनी बन गई है।

कंपनी के अनुसार उसने 2019 में उपमहाद्वीप में एक सप्ताह में 14 मिलियन से अधिक राइड्स प्रदान की हैं, जो साल 2018 के हर हफ़्ते 11 मिलियन के आँकड़े से अधिक थीं। हालाँकि यह सभी शानदार दावे Uber के आंतरिक आँकड़ो का ही नतीजा हैं।

और इसलिए सवाल भी उठने लाजमी हैं, क्यूंकि Uber के दुनिया भर में सबसे बड़े प्रतिद्वंदी Ola ने भी कुछ समय पहले इसी पैमाने पर एक टॉप कंपनी होने का दावा किया था। आपको बता दें 2018 में Ola ने हर दिन 2 मिलियन से अधिक लोगों को हर रोज राइड्स प्रदान करने का दावा किया था। और देखा जाए तो यह आँकड़ा Uber के इन आँकड़ो से कहीं न कहीं मेल खाता नज़र आता है। बस Ola ने साल 2018 में ये दावे किये थे और Uber ने बीते साल के आँकड़ो को लेकर ऐसा दावा पेश किया है।

ऐसे में यह कह पाना कि वास्तव में भारत के कैब सर्विस क्षेत्र में कौन सबसे ऊपर है, यह थोड़ा मुश्किल है, लेकिन मोटे तौर पर देखने पर Ola आज भी आगे ही नज़र आता है।

लेकिन एक बार फ़िर से हम दोहरा दें इसको साबित करने के लिए कोई अन्य अधिकारिक आँकड़े नहीं मौजूद हैं, सिवाए दोनों कंपनियों के अपने अपने दावों के, जो वह खुद से करती नज़र आती रही हैं।

वैसे इस बीच Uber-Ola के बीच यह प्रतिद्वंद्विता अब ब्रिटेन में भी शुरू हो गई है, वह भी Uber के लिए सबसे बेहतर बाज़ार में, जो है लंदन।

जी हाँ! दरसल एक ओर Uber जहाँ लंदन में अपनी सेवा के संचालन हेतु प्रतिबंध का सामना कर रहा है, वहीँ Ola घोषणा कर चुका है कि कंपनी 10 फरवरी से लंदन में अपना संचालन शुरु करने जा रही है।

बता दें Ola के लिए भी यह आसान नहीं रहा,  कंपनी को लंदन में अपने संचालन के लिए लाइसेंस मिलने के बाद भी काफी समय लग गया। जिसकी वजह भी Ola ने अतिरिक्त सुरक्षा सुविधाओं को बताया, मलतब कंपनी देरी का कारण आवश्यक मानकों को सुनिश्चित करने को बताती है।

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