चीन की स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां लगातार विश्व भर के स्मार्टफोन बाजार में मजबूत पकड़ स्थापित करती जा रहीं हैं। आलम यह है कि दुनिया की टॉप 5 स्मार्टफोन कंपनियों में से तीन चीन से हैं।

इतना ही नहीं, दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्मार्टफोन निर्माता देश यानि भारत में भी टॉप 5 में से 4 कंपनियां चीन की हैं, जिनमें से तीन एक ही पैरेंट कंपनी के अधीन हैं।

लेकिन ये कंपनियां यहीं नहीं रुकना चाहतीं, दरसल हार्डवेयर क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाने के बाद अब चीन की इन कंपनियों से स्मार्टफोन में Google के प्रभुत्व को भी चुनौती देने का मन बना लिया है।

Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार Xiaomi, Huawei, Oppo और Vivo साथ आकर Google Play Store के विकल्प को विकसित करने की दिशा में काम कर रहें हैं। सूत्रों के अनुसार यह विकल्प, चीन के बाहर के डेवलपर्स को भी अन्य के साथ अपने सभी ऐप स्टोर्स पर भी ऐप अपलोड करने की अनुमति देगा।

हालाँकि इन सभी कंपनियों के पास अपने-अपने स्मार्टफोन पर प्री-लोडेड ऐप स्टोर आज भी होते हैं। लेकिन एंड्रॉइड के डिफ़ॉल्ट Play Store की तुलना में इन ऐप स्टोर्स पर ट्रैफिक काफ़ी कम होता है। और अब Google Play Store के इसी वैश्विक प्रभुत्व को खत्म करने के मकसद से इन कंपनियों से इस दिशा में आक्रामक प्रयास शुरू किये हैं। कंपनियां कथित रूप से इस पहल को ग्लोबल डेवलपर सर्विस अलायंस (GDSA) का नाम भी दे चुकी हैं।

सूत्रों की माने तो GDSA को शुरुआत में मार्च में लॉन्च करने का लक्ष्य बनाया जा रहा रहा था, लेकिन हाल ही में कोरोनावायरस के प्रकोप के चलते इसको थोड़ा टला गया है। वहीँ एक प्रोटोटाइप वेबसाइट का कहना है कि यह तैयार किया जा रहा प्लेटफ़ॉर्म शुरू में भारत, इंडोनेशिया और रूस सहित नौ “देशों” को कवर करता नज़र आएगा।

Canalys रिसर्च के माध्यम से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, आपको बता दें इन चार चीनी स्मार्टफोन ब्रांडों ने एक साथ 2019 में करीब 40% से अधिक बाजार हिस्सेदारी हासिल की।

वहीँ दिलचस्प है भी है कि इन चारों में से एक, Huawei पहले से ही अपने अलग ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) को लेकर काम कर रहा है। दरसल Huawei ने यह कदम अमेरिका द्वारा कंपनी पर अपने उपकरणों के जरिये जासूसी का आरोप लगाते हुए बैन लगाने के बाद उठाया है।

आपको बता दें इस अमेरिकी प्रतिबंध के तहत सभी अमेरिकी कंपनियों को Huawei के साथ सभी सहयोग को तुरंत रोकने का आदेश दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप अपने नए फोनों के लिए Huawei के पास एंड्रॉइड के इस्तेमाल के विकल्प भी खत्म हो गये हैं।

इन सभी कारणों ने दुनिया के सबसे बड़े दूरसंचार उपकरण निर्माता और विक्रेता, Huawei को अपना खुद का HarmonyOS बनाने के लिए प्रेरित किया, जो एंड्रॉइड (अधिकांश चीनी OEMs के विपरीत) पर निर्मित एक कस्टम OS नहीं है।

लेकिन इतना जरुर है कि इस OS के पूर्ण विकास में अभी काफी समय लग सकता है। पर हम यह बता दें कि Huawei ने अपने ऐप डेवलपर्स के कार्यक्रम के लिए $1 बिलियन से अधिक का निवेश किया है।

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