भारत में 3 प्राइवेट और 1 राज्य अधीन टेलीकॉम ख़िलाड़ी हैं। इन 3 निजी खिलाडियों में से मुख्य दो भारती एयरटेल (Bharati Airtel) और ब्रिटेन आधारित वोडाफोन (Vodafone) फ़िलहाल कुछ समय से अच्छी हालत में नहीं है।

और अब ऐसा लगता है इन दोनों कंपनियों को शायद ही जल्द राहत मिल सके। जी हाँ! ऐसा इसलिए क्यूंकि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने एक फैसले में टेलीकॉम कंपनियों पर लगे $14 बिलियन के जुर्माने पर राहत देने वाली अपील को खारिच कर दिया है।

आपको बता दें इससे पहले के अपने एक आदेश में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने टेलीकॉम कंपनियों को केंद्र सरकार के $1 ट्रिलियन (करीब $14 बिलियन) का बकाया चुकाने के निर्देश दिए थे।

बता दें इस $1 ट्रिलियन की रकम में जहाँ भारती एयरटेल (Bharati Airtel) पर सरकार का 35,586 करोड़ ($5 बिलियन) का बकाया है, वहीँ वोडाफोन-आइडिया (Vodafone-Idea) पर 50,000 करोड़ ($7.2 बिलियन) का बकाया है।

लेकिन अब Livemint की रिपोर्ट के मुताबिक Airtel और Vodafone दोनों ही सुप्रीम कोर्ट के इस नए फैसले को लेकर क्यूरेटिव पेटिशन दाखिल करने का मन बना रहें हैं।

सूचना यह भी है कि Airtel ने उधारदाताओं से $3 बिलियन का कर्ज ले लिया है। और वह इस राशि का उपयोग सरकारी बकाए के भुगतान के लिए कर सकता है।

वहीँ Reliance के मालिकाना हक़ वाला Jio भी इससे अछूता नहीं है। अदालत द्वार Jio पर भी जुर्माना लगाया गया है। लेकिन Airtel और Vodafone की तुलना में Jio की जुर्माना राशि काफी कम है।

इसके साथ ही इसके साथ ही दिलचस्प रूप से 14,000 करोड़ रूपये का बकाया बंद हो चुकी Tata Teleservices पर भी लगाया गया है, जो कभी Tata Sons के नेतृव में संचालित होती थी। हालाँकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि अब यह रकम बंद हो चुकी कंपनी से कैसे वसूला जाएगा?

दरसल यह जुर्माने का  मुद्दा AGR शब्द की परिभाषा से उपजा है। 24 अक्टूबर को दिए गये अदालत
के आदेश (जिसके विरूद्ध यह अपील दायर की गई थी) में कोर्ट ने इसकी परिभाषा में सरकार के पक्ष को सही माना।

दरसल सरकार ने AGR को लाइसेंस के सभी राजस्व के रूप में परिभाषित किया
है, इसमें गैर-कोर दूरसंचार परिचालन जैसे किराए, लाभांश और ब्याज आय भी शामिल किये गये हैं।

लेकिन इस अपील के खारिच होने के बाद अब टेलीकॉम कंपनियों को मजबूरन सप्ताह भर के अन्दर इस बकाए का भुगतान करना होगा।

इस बीच विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस फैसले से Airtel के फ़िर से उभर सकने की उम्मीद तो है, लेकिन Vodafone इस फैसले की वजह से ढह सकने के कगार पर है। वहीँ ब्रिटेन स्थित Vodafone पैरेंट इकाई के सीईओ Nick Read ने एक विवादित बयान में अपने भारतीय व्यापार में किसी भी तरह की वित्तीय मदद देने से पहले ही इंकार कर दिया है। हालाँक बाद में उन्होंने केंद्र सरकार से माफी भी मांगी।

वहीँ देखा जाए तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद दिलचस्प समय में आया है। क्यूंकि इस फैसले के बाद देश में टेलीकॉम कंपनियों की 5G रोल आउट करने संबंधी महत्वकांक्षा को धक्का लग सकता है। दरसल जाहिर तौर पर इस जुर्माने के बाद कंपनियों के निवेश करने की क्षमता कम हो जाएगी और स्पेक्ट्रम नीलामी उनके लिए महंगी प्रतीत हो सकती है।

इस बीच Airtel ने एक बयान में कहा;

“इस इंडस्ट्री में हमें नेटवर्क का विस्तार करने, 5G जैसी नई तकनीकों की शुरुआत इत्यादि के लिए निवेश को जारी रखना चाहिए। लेकिन अब यह निवेश राशि इस जुर्माने के चलते ही प्रभावित हो जाएगी, जिससे देश का डिजिटल मिशन भी प्रभावित हो सकता है।”

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