जहाँ एक तरफ मीडिया ने Amazon के फाउंडर और सीईओ Jeff Bezos की भारत के SMEs क्षेत्र में $1 बिलियन डॉलर के अतिरिक्त निवेश की खबर को एक बड़ा ऐलान बताते हुए काफी हाईलाइट कर दिया है।

वहीँ केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, पीयूष गोयल ने अब मीडिया से अलग जाकर एक बड़ा बयान दिया है। दरसल नई दिल्ली में एक सम्मेलन में गोयल ने कहा कि Amazon ने इस निवेश की घोषणा करके भारत पर कोई बड़ा एहसान नहीं किया है। दरसल कंपनी के बढ़ते घाटे इस तरह के निवेश का मुख्य कारण हैं।

नई दिल्ली में थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में पीयूष गोयल ने कहा,

“अच्छा है वह हर साल $1 बिलियन के निवेश का मन बना रहें हैं, लेकिन जब वह हर साल करीब इतना ही नुकसान उठा रहें हैं, तो उसकी भरपाई के तौर पर उनका यह निवेश लाजमी नज़र आता है।”

आगे भी कैबिनेट मंत्री ने कहा;

“ऐसा नहीं है कि वह यह $1 बिलियन का निवेश करके भारत पर कोई बहुत बड़ा एहसान करने जा रहें हैं।”

पीयूष गोयल ने यह बयान ‘Raisina Dialogue 2020’ नामक एक सम्मेलन में दिया, जो वैश्विक लीडर्स द्वारा वैश्विक रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए आयोजित एक वार्षिक सम्मेलन है।

इसके साथ ही आपको बता दें कि Bezos ने प्रधानमंत्री से भी मुलाकात का समय माँगा था, लेकिन लेकिन अभी तक इसके लिए मंजूरी नहीं मिल सकी है।

इस बीच गोयल के बयान के साथ यह स्पष्ट है कि यह आपसी संबंध काफी तनावपूर्ण हैं और या सिर्फ़ Amazon ही नहीं बल्कि Walmart के साथ की भी स्थिति है।

वहीँ एक सच यह भी है कि Jeff Bezos की भारत यात्रा ऐसे समय में हुई है जब उनकी कंपनी देश में कई तरह की परेशानियों का सामना कर रही है।

एक ओर जहाँ सरकार के द्वारा प्रस्तावित सरकारी नियम इसका कारण हैं, जो पूरी तरह से लागू होने के बाद भारत में व्यवसाय करने के लिए Amazon और Walmart के मालिकाना हक़ वाले Flipkart को अपने व्यवसाय मॉडल को बदलने के लिए विवश कर देंगें।

वहीँ दूसरी ओर Amazon को अपने प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े विक्रेताओं के विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। इन विरोधों के कारणों में कमीशन से लेकर भारी छूट प्रदान करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

वहीँ इस बीच खबर यह भी है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने कथित तौर पर ऐसे आरोपों को लेकर Amazon और Flipkart के खिलाफ़ जाँच भी शुरू कर दी है।

CCI असल में स्मार्टफोन कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्मो के बीच चुनिंदा फ़ोनों की विशेष रूप से सिर्फ़ और सिर्फ़ ऑनलाइन बिक्री को लेकर भी जाँच कर रहा है, जिसके चलते कथित तौर पर ऑफलाइन व्यापरियों का भारी नुकसान हो रहा है।

इसके साथ ही CCI ने इन दोनों प्लेटफ़ॉर्मो के खिलाफ़ भारी छूट देते हुए अपने अपने ब्रांड लेबल को प्रमोट करने संबंधी आरोपों के जाँच के भी आदेश दिए हैं।

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