भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात क्षेत्र 2014 के बाद से हर साल रिकॉर्ड ऊंचाईयों को छू रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात क्षेत्र भारत में एक सुस्त विनिर्माण सेक्टर होने के बाद भी काफी कम ही चर्चा में रहने वाला क्षेत्र है।

लेकिन अब भारत सरकार ने इस क्षेत्र में देश के भीतर विदेशी निर्माता कंपनियों को आकर्षित करने के लिए और अधिक निवेश करने का मन बनाया है।

Bloomberg द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार मोदी सरकार देश में और भी अधिक विदेशी मोबाइल विनिर्माण कंपनियों को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहनों का एक समूह बनाने की तैयारी कर रही है।

आपको बता दें वर्तमान में भारत 1.70 लाख करोड़ रूपये (करीब $24 बिलियन) तक के फ़ोनों का निर्माण करता है। लेकिन अब सरकार इस आँकड़े को 2025 तक 13.46 लाख करोड़ रूपये (करीब $190 बिलियन) तक ले जाने की योजना बना रही है। यहाँ तक कि कथित तौर पर इस दिशा में सरकार अपना पहला कदम बढ़ा भी चुकी है।

दरसल Bloomberg से बात करने वाले (पहचान गोपनीय) एक सरकारी अधिकारी के अनुसार इस साल के संघीय बजट में सरकार विदेशी मोबाइल निर्माताओं को स्थानीय स्तर पर लोन में रियायत देने जा रही है। इसके अलावा सरकार इन कंपनियों के लिए एक विशेष इंडस्ट्री क्लस्टर तैयार करने की भी योजना बना रही है, जिसको पहले से ही विभिन्न विदेशी इकाई टैक्सों और कस्टम से मंजूरी दे दी जाएगी।

इतना ही नहीं, भारत सरकार इन कंपनियों को बुनियादी ढांचे जैसे सड़क निर्माण, बिजली और पानी इत्यादि को लेकर भी विशेष मदद प्रदान करेगी।

इस बीच इतना जरुर बता दें इन सभी चीज़ों पर अभी सरकार की ओर से अधिकारिक पुष्टि का इंतजार ही किया जा रहा है।

आँकड़ो की बात करें तो मोबाइल विनिर्माण के मामले में भारत ने पिछले 5 सालों में रिकॉर्ड सफलता दर्ज की है।

देश में Foxconn जैसी कंपनी ने भी iPhones इत्यादि के उत्पादन में काफी विस्तार किया है। शुरू में घरेलू खपत के मकसद से निर्माण करने के बाद अब देश में निर्मित iPhones का एक बड़ा हिस्सा दुनिया भर में भी निर्यात किया जाने लगा है।

इसके साथ ही Samsung ने भी इस क्षेत्र में भारत को काफी मजबूत स्थिति प्रदान की है। इस दक्षिण कोरियाई नामी कंपनी ने नोएडा में दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल विनिर्माण सुविधा स्थापित की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.